UP में 4 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हुई। इससे पहले योगी सरकार का आदेश आ गया कि यात्रा के रूट पर नॉनवेज की दुकानें बंद रहेंगी। यात्रा का रूट यानी जिस रास्ते से कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटते हैं।
योगी सरकार आने के बाद कांवड़ यात्रा के दौरान हर बार नॉनवेज की दुकानें और नॉन-वेजिटेरियन खाना परोसने वाले होटल बंद रखने का आदेश आता है, पर इस बार मुजफ्फरनगर जिले में मुस्लिमों के वेजिटेरियन होटल भी बंद करा दिए गए। हालांकि, पड़ोसी जिले सहारनपुर और बिजनौर में होटल खुले हैं।
मुजफ्फरनगर में ही ऐसा क्यों हुआ, इसकी पड़ताल करने हम ग्राउंड पर पहुंचे। यहां सड़क किनारे कई रेस्टोरेंट, होटल और ढाबे बंद मिले। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिन पर हिंदू देवी-देवताओं की फोटो लगी हैं। नाम भी हिंदुओं जैसे हैं। इनके आगे बांस-बल्लियों से बैरिकेडिंग हैं या कपड़े से आगे का हिस्सा ढंक दिया गया है।
पता चला कि इन होटलों के मालिक मुस्लिम हैं। मुजफ्फरनगर में एक संत 'फूड जिहाद' के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। इस वजह से ये होटल बंद करवा दिए गए।
दिल्ली से देहरादून जाने वाले नेशनल हाईवे-58 पर दूर तक सिर्फ भगवा रंग है। हाईवे की एक लेन सिर्फ कांवड़ियों के लिए रिजर्व है। दूसरा हिस्सा गाड़ियों के लिए है। यही वजह है कि ट्रैफिक की रफ्तार धीमी है। जगह-जगह पुलिसवाले खड़े हैं। भीड़ इतनी है कि बार-बार जाम लग जाता है। इन रास्तों से डाक कांवड़ वाले निकल रहे हैं। ये या तो दौड़ते हुए निकलते हैं या फिर बाइक से।
हम आगे बढ़े, शहर के बाहरी इलाके में शामली रोड पर सड़क किनारे चाय-नाश्ते की दुकान दिखी। बोर्ड पर लिखा था ओन मोहम्मद जैदी टी स्टॉल। दुकान चारों तरफ से जालियों से कवर है। पूछा तो पता चला कि पहले ये दुकान ‘भूरा टी स्टाल’ नाम से थी, दुकान चलाने वाला मुस्लिम है, इसलिए लोगों ने विरोध किया। तब पुलिसवालों ने सही नाम वाला बोर्ड लगाने के लिए कहा था। इसके बाद बोर्ड पर नाम बदल दिया गया।
