कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपने घर, पुश्तैनी जमीन या खुदाई के दौरान गड़ा हुआ खजाना मिलता है तो वह स्वतः उसका मालिक नहीं बन जाता। इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878 के तहत ऐसी स्थिति में इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन को देना अनिवार्य है। देश में लागू इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878 तथा राजस्थान में इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स, 1961 के अनुसार गड़े हुए खजाने पर सबसे पहला अधिकार राज्य सरकार का माना जाता है। प्रशासन जांच के बाद ही तय करता है कि खजाने पर किसी व्यक्ति का वैध दावा बनता है या नहीं। यदि कोई व्यक्ति दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह साबित कर देता है कि मिला हुआ खजाना उसके पूर्वजों का है और कानूनन उसका दावा सही है, तो जांच पूरी होने के बाद प्रशासन उसे खजाना सौंप सकता है। खजाना मिलने की सूचना के बाद उसे सरकारी ट्रेजरी में सुरक्षित रखा जाता है। जिला कलेक्टर सार्वजनिक नोटिस जारी कर संभावित दावेदारों से दावे आमंत्रित करते हैं। दावेदारों को अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। यदि जांच में खजाना 100 वर्ष या उससे अधिक पुराना तथा ऐतिहासिक महत्व का पाया जाता है तो उसे एंटीक्विटी एंड आर्ट ट्रेजर्स संबंधी कानूनों के तहत पुरातात्विक धरोहर माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में वह सरकार की संपत्ति बन जाता है और किसी निजी व्यक्ति को नहीं सौंपा जाता। यदि खजाना 100 वर्ष से कम पुराना हो और कोई वैध दावेदार सामने नहीं आए, तो कानून के अनुसार परिस्थितियों के आधार पर खोजकर्ता और जमीन मालिक के बीच उसका हिस्सा तय किया जा सकता है। कुछ मामलों में खोजकर्ता को अधिक और जमीन मालिक को कम हिस्सा दिए जाने का प्रावधान भी है। कानून के अनुसार खुदाई या अन्य किसी माध्यम से मिलने वाली मूल्यवान वस्तु, सोना-चांदी या खजाने की सूचना प्रशासन को देना अनिवार्य है। सूचना छिपाना या खजाने को अपने पास रखना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। यदि खजाना किसी सार्वजनिक स्थान या सरकारी भूमि पर मिलता है तो उस पर सरकार का अधिकार माना जाएगा। ऐसी स्थिति में खजाने को छिपाना, बेचने या अपने पास रखने का प्रयास करना दंडनीय अपराध हो सकता है। जयपुर में हवेली की खुदाई के दौरान खजाना मिलने के दावे की जांच फिलहाल पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दावा कितना सही है और यदि वास्तव में खजाना मिला है तो उस पर कानूनी अधिकार किसका होगा।जयपुर। राजधानी जयपुर में एक हवेली की खुदाई के दौरान खजाना मिलने के दावे ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है। हवेली मालिक ने आरोप लगाया है कि खुदाई के दौरान ठेकेदार और उसके साथियों को बड़ी मात्रा में चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे कलश और पुराने चांदी के सिक्के मिले, जिन्हें उन्होंने आपस में बांट लिया। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि यदि किसी की पुश्तैनी जमीन या मकान में खजाना मिलता है तो उस पर अधिकार किसका होता है? आइए जानते हैं कानून क्या कहता है।
पुश्तैनी जमीन में मिला खजाना क्या आपका हो जाता है?
खजाने पर पहला अधिकार किसका होता है?
पूर्वजों का खजाना साबित होने पर मिल सकता है अधिकार
दावेदारों की जांच कैसे होती है?
100 साल से अधिक पुराना खजाना हो तो क्या होगा?
खोजने वाले और जमीन मालिक को कब मिलता है हिस्सा?
सरकार को सूचना देना क्यों जरूरी है?
सरकारी जमीन पर मिला खजाना किसका होगा?
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हवेली की खुदाई में खजाना मिलने के दावे के बाद उठे सवाल, जानिए किसका होता है जमीन में दबा खजाना:
खजाने पर पहला अधिकार किसका, क्या कहता है कानून
- by रितेश पारीक
- Jul 19,2026
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