रूस के कब्जे वाले क्रिमिया में एक ब्रिज पर रविवार देर रात अटैक हुआ । इसमें 2 लोगों की मौत हो गई।रूस ने इस हमले का आरोप यूक्रेन पर लगाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में जान गंवाने वाला एक दंपत्ति है। इनकी बच्ची भी घायल हुई है। अटैक के कई वीडियोज वायरल हो रहे हैं। इनमें टूटा हुआ ब्रिज दिखाई दे रहा है।
हमले के तुरंत बाद लोकल प्रशासन ने ब्रिज पर ट्रैफिक को रोक दिया। ये हमला रूस-यूक्रेन के बीच हुई ग्रेन डील खत्म होने के एक दिन पहले हुआ है। दरअसल, जंग के चलते पिछले साल ब्लैक सी में सामान की डिलीवरी को लेकर दोनों देशों के बीच सेफ रूट देने की एक डील कराई गई थी। कल इस डील कल के खत्म होने की आखिरी तारीख है। इससे दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

फुटेज क्रिमिया में ब्रिज पर हुए हमले के बाद बताई गई है।
रूस ने ब्रिटेन- अमेरिका को भी घेरा
रूस ने क्रिमिया में हुए हमले का आरोप न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन पर भी लगाया है। रूस ने कहा है कि इस आतंकी हमले का इंचार्ज कोई और नहीं बल्कि ब्रिटेन और अमेरिका हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जिस क्रेच ब्रिज पर हमला हुआ है वो रूस के लिए काफी अहम है।
अगर कुछ घंटे के लिए भी इस पर आवाजाही बंद करनी पड़ी तो इससे रूस को जंग में नुकसान पहुंचता है। इसकी वजह ये है कि रूसी सेना के लिए जंग में इस्तेमाल होने वाला जरूरी सामान इस रास्ते से पहुंचाया जाता है। वहीं, रूस ने घोषणा की है कि वो अब यूक्रेन के साथ हुआ ब्लैक सी ग्रेन डील का हिस्सा नहीं रहेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता डिमिट्री पेस्कोव ने कहा है कि डील से बाहर होने का ब्रिज पर हुए हमले से कोई संबंध नहीं है।

2014 में रूस के कब्जे से पहले क्रिमिया यूक्रेन का हिस्सा था।
जानें क्या है वो ग्रेन डील जिससे रूस ने खुद को बाहर किया...
रूस-यूक्रेन जंग के बाद अफ्रीकी देशों में अनाज की भारी कमी हो गई थी। जंग के बाद यूक्रेन से अनाज और तेल बीजों का निर्यात लगभग बंद हो गया था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे लेकर चेतावनी दी थी।
उन्होंने कहा था- अगर युद्ध लंबा खिंचा और रूस, यूक्रेन से अनाज की सप्लाई सीमित रही तो करोड़ों लोगों के गरीबी के जाल में फंसने का खतरा है। राजनीतिक अशांति बढ़ेगी, बच्चों की शारीरिक वृद्धि प्रभावित होगी और भुखमरी फैलेगी।
इसकी वजह ये थी कि काफी देश यूक्रेन से गेहूं इम्पोर्ट करते हैं, जो ब्लैक सी के जरिए किया जाता है। जंग के शुरुआती दिनों में रूस और यूक्रेन ब्लैक सी से गुजरने वाले एक-दूसरे के जहाजों पर हमला करने लगे थे। जिससे सप्लाई चेन ठप पड़ गई थी।

हालात बिगड़ते देख तुर्किये और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों के बीच एक डील कराई थी। डील के तहत रूसी सेना यूक्रेन के बंदरगाहों पर हमला नहीं करेगी। तुर्की और संयुक्त राष्ट्र जहाजों का निरीक्षण करेंगे जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके की रूसी हथियार यूक्रेन न लाए जा रहे हों।
