Fri, 08 07, 2026
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बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: पूर्व टेंपल अधिकारी गिरफ्तार, SIT की कार्रवाई तेज:

रिटायरमेंट के 17 दिन बाद गिरफ्तारी, CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हेराफेरी में भूमिका का आरोप

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देहरादून/बद्रीनाथ।

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शुक्रवार को दूसरी गिरफ्तारी करते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व टेंपल अधिकारी एवं तत्कालीन थाली भेंट गणना प्रभारी राजेंद्र सिंह चौहान को ज्योतिर्मठ से गिरफ्तार किया है। चौहान 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे। गिरफ्तारी से पहले उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई।

इससे पहले 12 जुलाई को बीकेटीसी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, दान गणना के खजांची संदेश मेहता को पद से हटाया गया है।

CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई

एसआईटी के अनुसार जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में राजेंद्र सिंह चौहान की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी का दावा है कि चढ़ावा गणना के दौरान प्राप्त नकदी और अन्य दान सामग्री का कुछ हिस्सा उन्होंने अपने कब्जे में लिया।

षड्यंत्र कर हेराफेरी का आरोप

पुलिस का आरोप है कि राजेंद्र सिंह चौहान और प्रमोद नौटियाल ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत थाली भेंट की गणना के दौरान प्राप्त धनराशि और अन्य दान सामग्री में कथित हेराफेरी की। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराएं जोड़ते हुए चौहान को सह-अभियुक्त बनाया गया है।

अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ

एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए तीन अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी एक बाहरी व्यक्ति की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जो चढ़ावा गणना के दौरान कथित रूप से मौजूद था।

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश

उधर, बीकेटीसी की चार सदस्यीय जांच समिति ने 18 पेज की रिपोर्ट समिति अध्यक्ष को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावा कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड और पहचान पत्र अनिवार्य करने, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था तथा सीसीटीवी निगरानी को और प्रभावी बनाने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

2 जुलाई को सामने आया था मामला

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा गणना के दौरान कथित हेराफेरी का मामला 2 जुलाई को सामने आया था। शिकायत के बाद बीकेटीसी ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसके बाद एसआईटी और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई। मामले में जांच लगातार जारी है।

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