Thu, 08 06, 2026
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30 जुलाई से शुरू होगा सावन, महाकाल मंदिर में विशेष तैयारियां; 3 अगस्त को निकलेगी पहली राजसी सवारी:

उज्जैन में हर दिन पहुंचेंगे 4 लाख श्रद्धालु

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उज्जैन। भगवान शिव के प्रिय सावन माह की शुरुआत इस वर्ष 30 जुलाई (गुरुवार) से हो रही है, जबकि इसका समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा। पूरे सावन माह में शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और धार्मिक आयोजन होंगे। मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सावन के दौरान प्रतिदिन करीब 4 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है।

3 अगस्त को निकलेगी पहली राजसी सवारी

सावन के चार और भाद्रपद (भादौ) माह के दो सोमवार को भगवान महाकाल की पारंपरिक राजसी सवारी निकाली जाएगी। पहली सवारी 3 अगस्त को तथा अंतिम सवारी 7 सितंबर को निकलेगी।

सवारी शाम 4 बजे महाकाल मंदिर परिसर से रवाना होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां मां शिप्रा के जल से भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पूजन और आरती होगी। इसके बाद सवारी पुनः मंदिर लौटेगी और शाम करीब 7 बजे मंदिर पहुंचेगी।

चलित आरती दर्शन की व्यवस्था

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस वर्ष भी सभी प्रमुख आरतियों में कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित आरती दर्शन की सुविधा मिलेगी।

राजसी सवारी में इस बार पांच एलईडी रथ शामिल किए जाएंगे। साथ ही जनजातीय सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमें और 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी।

सावन में बदलेगा मंदिर खुलने का समय

30 जुलाई से 7 सितंबर तक सावन-भाद्रपद मास के दौरान मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 3 बजे खुलेंगे, जबकि प्रत्येक सोमवार को सुबह 2:30 बजे खुलेंगे।

  • भस्म आरती: प्रतिदिन सुबह 3:00 से 5:00 बजे तक
  • सोमवार को भस्म आरती: सुबह 2:30 से 4:30 बजे तक

8 सितंबर से मंदिर की समय-सारिणी पुनः सामान्य हो जाएगी।

दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था

श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग निर्धारित किए हैं।

श्रद्धालु नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल मार्ग, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम से होकर भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।

वहीं, नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालु मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1 और टनल मार्ग से दर्शन करने के बाद निर्माल्य द्वार अथवा आपातकालीन द्वार से बाहर निकलेंगे।

प्रदेशभर के शिवालयों में तैयारियां पूरी

सावन माह के आगमन को लेकर प्रदेशभर के शिव मंदिरों में विशेष सजावट, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

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