Fri, 08 07, 2026
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12 साल के एकांश ने इंटरनेशनल कराटे में जीता गोल्ड, अब विदेश में तिरंगे के साथ देश का नाम रोशन करने का सपना:

पांच साल की उम्र में शुरू किया कराटे, हार से सीखा और मेहनत के दम पर नेपाल के खिलाड़ी को हराया

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चित्तौड़गढ़। महज 12 साल की उम्र में चित्तौड़गढ़ के एकांश अगनानी ने इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। कोलकाता में आयोजित 10वीं इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप इंडियन चैलेंजर कप-2026 में एकांश ने नेपाल के खिलाड़ी को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अब उनका अगला लक्ष्य विदेश में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगा लहराना है।

सेल्फ डिफेंस सीखने की जिद से शुरू हुआ सफर

एकांश ने बताया कि बचपन से ही उन्हें सेल्फ डिफेंस सीखने का शौक था। पांच वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता मुकेश अगनानी और याशिका अगनानी से कराटे सीखने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्होंने कराटे अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया। उनके कोच मोहित वैष्णव ने शुरुआत से ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें तकनीक के साथ मानसिक मजबूती का भी प्रशिक्षण दिया।

पहली हार के बाद नहीं मानी हार

नौ साल की उम्र में एकांश ने पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेली, लेकिन पदक नहीं जीत सके। इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत और अभ्यास को और बढ़ाया। अगले वर्ष नेशनल में कांस्य, फिर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद रांची में आयोजित प्रतियोगिता में भी गोल्ड अपने नाम किया और अब इंटरनेशनल स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर नया मुकाम बनाया।

रोज 2 से 3 घंटे अभ्यास, पढ़ाई भी साथ

एकांश प्रतिदिन दो से तीन घंटे कराटे का अभ्यास करते हैं और पढ़ाई के लिए भी नियमित समय निकालते हैं। उनका मानना है कि अनुशासन और समय का सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है। मुकाबले से पहले घबराहट जरूर होती है, लेकिन भारत के लिए तिरंगा ओढ़कर गोल्ड जीतने का सपना उन्हें आत्मविश्वास देता है।

पांच साल में जीते 16 पदक

कम उम्र में ही एकांश ने शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने अब तक 10 गोल्ड, 1 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 पदक जीते हैं। इनमें एक इंटरनेशनल गोल्ड, दो नेशनल गोल्ड, एक नेशनल ब्रॉन्ज, तीन स्टेट गोल्ड, एक स्टेट सिल्वर, तीन स्टेट ब्रॉन्ज, चार जिला गोल्ड और एक जिला ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके अलावा वह ब्लैक बेल्ट भी हासिल कर चुके हैं।

अब विदेश में भारत के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्य

कोच मोहित वैष्णव ने बताया कि दिसंबर में पुडुचेरी में होने वाली प्रतियोगिता के बाद एकांश को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। इंटरनेशनल गोल्ड जीतने के बाद उनका अगला सपना विदेश में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाना है।

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