बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना के डेटा जारी कर दिए हैं। काफी लंबे समय से इस जनगणना को लेकर विवाद हो रहा था। इसे रोकने के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया गया था। लेकिन यह जनगणना कराई गई और अब आंकड़े सामने हैं। जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक राज्य में अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 36 प्रतिशत है, जबकि पिछड़े वर्ग की आबादी लगभग 27.12 प्रतिशत है। दोनों वर्ग को मिला दें तो साफ़ है कि यहां पिछड़ा वर्ग की टोटल आबादी 63 प्रतिशत से भी ज्यादा है। जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था। बिहार विधानसभा के सभी 9 दलों की सहमति से निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराएगी एवं दिनांक 02-06-2022 को मंत्रिपरिषद से इसकी स्वीकृति दी गई थी। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराई है। जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी तथा जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा।
