कोरोना काल में शहर के जिला चिकित्सालय में लगाए गए एक सौ लीटर से लेकर एक हजार लीटर की क्षमता के 4 ऑक्सीजन प्लांट मरम्मत न होने के कारण कबाड़ हो रहे हैं।
इन चारों प्लांट की तत्कालीन कीमत दो करोड़ रुपए से अधिक थी। इनमें से एक हजार लीटर क्षमता का प्लांट पीएम केयर फंड से लगाया गया था, उसके अलावा तीन प्लांट राज्य सरकार की ओर से नगर परिषद के मार्फत लगाए गए थे।
अब हालत यह है कि राज्य सरकार की ओर से लगाए गए तीनों प्लांट लगाने के कुछ समय बाद से ही बंद हैं। अस्पताल प्रशासन ने नगर परिषद को ये बंद प्लांट वारंटी अवधि में मरम्मत करवाने के लिए कई बार पत्र लिखे और नगर परिषद ने बंधित कंपनी को पत्र लिखे, लेकिन नतीजतन इन प्लांटों की मरम्मत नहीं हुई।
अब इन प्लांटों की वारंटी अवधि बीत चुकी है और मरम्मत के लिए लाखों रुपए की जरूरत है। ऐसे में अस्पताल में लगे चार में से तीनों प्लांट बंद पड़े हुए हैं।
इतना हुआ था खर्च
राज्य सरकार की ओर से अप्रेल 2021 में बालोतरा के राजकीय नाहटा जिला चिकित्सालय में करीब 25 लाख रुपए की लागत से ऑल टाइम डाटा प्राइवेट लिमिटेड 110 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से नगर परिषद के जरिए जुलाई 2021 में करीब 65 लाख रुपए खर्च कर 250 व 500 लीटर क्षमता के दो प्लांट लगाए गए थे। ये तीनों प्लांट लगाने के कुछ ही समय बाद बंद हो गए थे। वहीं अक्टूबर 2021 में करीब एक करोड़ की लागत से पीएम केयर फंड से एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। अब इन चारों प्लांटों में से केवल पीएम केयर फंड से स्थापित प्लांट ही संचालित हो रहा है।
अन्य प्लांट चलें तो कम हो व्यय
नाहटा अस्पताल में अलग-अलग क्षमता के चार ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हैं। अस्पताल में प्रति मिनट एक सौ से डेढ़ लीटर ऑक्सीजन की जरूरत रहती है। यहां स्थापित कम क्षमता के प्लांट बंद होने से अधिक क्षमता के प्लांट का चलाना पड़ते हैं। उस प्लांट को चलाने में बिजली समेत अन्य व्यय अधिक होता है। अगर सभी प्लांट संचालित होते है तो अस्पताल जरूरत के मुताबिक इन प्लांटों का संचालन कर सकता है, ताकि फिजूल का व्यय नहीं हो।
अस्पताल में ऑक्सीजन के चार में से तीन प्लांट लंबे समय से काम नहीं कर रहे है। इन प्लांट को सही करवाने के लिए नगर परिषद व राज्य सरकार को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हुई। इन प्लांटों की मरम्मत हो तो जरूरत के हिसाब से संचालन किया जा सके। - डॉ. बीएस गहलोत, पीएमओ
