झील, तालाब व प्रकृति से परिपूर्ण पर्यटन नगरी उदयपुर टूरिस्ट की पहली पसंद बन चुका है। प्रतिवर्ष यहां लाखों पर्यटक आ रहे हैं, लेकिन उनको घुमाने के लिए अब तक उदयपुर दर्शन के नाम से बस सेवा शुरू नहीं की गई। जबकि सभी महानगरों व टूरिस्ट सिटी में यह बसें संचालित हैं। ये पर्यटकों को सौ से डेढ़ सौ रुपए में पूरे शहर का भ्रमण करवाती हैं। उदयपुर में पर्यटकों को एक से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ऑटो या टैक्सी ही साधन है, जो मनमर्जी से 500 से एक हजार रुपए की राशि ले रहे हैं। शहर के आसपास के इलाके में जाते ही तो यह रेट तीन गुना हो जाती है। प्रशासन व निगम ने पूर्व में कागजों में ही इस बस को चलाया, हकीकत में यह अब तक सडक़ पर नहीं उतर पाई। हाल ही में सिटी ट्रांसपोर्ट बस के ठेकेदार को भी शर्त के मुताबिक दो बसें पर्यटकों के लिए उतारनी थी, लेकिन उसने भी पालना नहीं की।
100 रुपए में घुमाना था पूरा शहर: सिटी ट्रांसपोर्ट के ठेकेदार को शहर में दो बसें उदयपुर दर्शन के नाम से उतारनी थी। इनमें पर्यटकों को तय स्थान से बिठाकर पूरा शहर घुमाना था और वापस निर्धारित जगह लाकर छोडऩा था। इसमें किसी भी तरह से पर्यटकों पर भार नहीं पड़े इसके लिए 100 रुपए किराया निर्धारित किया था, लेकिन आज तक यह बस चल ही नहीं पाई। न हीं निगम ने ठेकेदार को बस चलाने के लिए पाबंद किया। निगम अधिकारियों का कहना है कि बसों को अभी डबल डेकर बनाया जा रहा है, यह फरवरी माह तक सडक़ों पर आ जाएगी।
पर्यटकों को सुबह से शाम तक घुमाना था : इन बसों में पर्यटकों को सुबह 9 से 11 बजे के बीच लेकर उन्हें शहर के समस्त टूरिस्ट प्वाइंट पर ले जाना था। हर प्वाइंट पर पर्यटक रुककर जगह को देख सके। शहर व उसके पास के इलाकों में घुमाने के बाद शाम को यात्रियों को वापस गंतव्य पर छोडऩा था। ऐसा करने से पर्यटक शहर के टूरिस्ट प्वाइंट पर कम खर्चे में आसानी से घूम सके।
यह बनाया था रूट चार्ज : टाउनहॉल से सूरजपोल, दूधतलाई, पिछोला, सिटी पैलेस, फतहसागर, राजीव गार्डन, नेहरू गार्डन, सहेलियों की बाड़ी से वापस टाउनहॉल। इसके अलावा अन्य रूट पर जाने पर किराया बढ़ाकर टूरिस्ट को वहां ले जाना था। अभी शहर में कई पर्यटन स्थल हैं, लेकिन उन्हें दिखाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं।
