पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और टिकट वितरण का कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन राजस्थान में लिंगानुपात सबसे ज्यादा चिंताजनक है। मध्य प्रदेश में भी ऐसे ही हालात हैं। राजस्थान में 1000 पुरुष मतदाताओं पर महिला मतदाता 920 ही हैं। वहीं मध्यप्रदेश में भी एक हजार पुरुषों पर 945 महिला मतदाता ही हैं, जबकि छत्तीसगढ़ और मिजोरम में महिला मतदाता पुरुषों से अधिक हैं। तेलंगाना, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में 1000 पुरुष मतदाताओं पर क्रमश: 998, 1060 और 1012 महिला मतदाता हैं।
हालांकि विधानसभा चुनाव में महिलाआ मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों की ओर से कई वादे किए जा रहे हैं और सरकार बनने पर महिलाओं के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू करने की घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन बिगड़ते लिंगानुपात की ओर किसी भी दल का ध्यान नहीं है और ना ही किसी राजनीतिक दल ने इसमें सुधार के लिए कोई घोषणा की है।
राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में एकमात्र निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां 1000 हजार पुरुष मतदाताओं पर 1001 महिला मतदाता हैं। वहीं मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में 26 सीटों पर एवं छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में 57 और तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों में से 4० पर महिला मतदाता अधिक हैं। छत्तीसगढ़ के नक्सलवादी क्षेत्र दंतेवाड़ा में 1,000 पुरुषों के मुकाबले 1,135 और चित्रकोट विधानसभा में 1,000 पुरुषों के मुकाबले 1,125 महिला मतदाता हैं। तेलंगाना के बालकोंडा और आर्मूर विधानसभा क्षेत्र में 1,000 पुरुषों पर क्रमश: 1162 और 1140 महिला मतदाता हैं। वहीं मध्यप्रदेश के निवास विधानसभा क्षेत्र में 1,000 हजार पुरुषों पर 1,030 महिला मतदाता हैं।
जयपुर में नए मतदाताओं में एक हजार पुरुषों पर सिर्फ 700 महिलाएं
जयपुर जिले का लिंगानुपात प्रदेश के औसत से कम है। जयपुर की सभी 19 विधानसभा सीटों पर 1000 पुरुष मतदाताओं पर औसत 915 महिला मतदाता हैं। वहीं पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में 1000 पुरुषों पर महिला मतदाता 700 ही हैं। जयपुर जिले में 18-19 वर्ष के मतदाताओं में 1000 पुरुषों पर 697 महिलाएं, वहीं 20-29 आयु वर्ग के मतदाताओं में 1000 पुरुषों पर 839 महिला मतदाता हैं।
