Fri, 08 07, 2026
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टोंक एमसीएच में हाई रिस्क प्रसूता का सफल ऑपरेशन, बच्चेदानी फटने के बाद बचाई मां-बेटी की जान:

डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, विशेषज्ञ डॉक्टरों ने समय रहते किया जटिल ऑपरेशन; चार यूनिट रक्त चढ़ाया गया

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टोंक। टोंक के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) में हाई रिस्क गर्भवती महिला का सफल इलाज कर चिकित्सकों ने मां और नवजात की जान बचाई। उनियारा क्षेत्र की प्रसूता कविता मीणा की डिलीवरी के बाद बच्चेदानी (यूटेराइन) फटने की गंभीर स्थिति बन गई थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समय रहते जटिल ऑपरेशन कर बच्चेदानी को रिपेयर किया। उपचार के दौरान प्रसूता को कुल चार यूनिट रक्त चढ़ाया गया। फिलहाल मां और नवजात बेटी दोनों स्वस्थ हैं।

पोस्ट डेट प्रेग्नेंसी के चलते कराया गया था भर्ती

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता राजोरा ने बताया कि उनियारा क्षेत्र के खोल्या गांव निवासी कविता मीणा को 19 जुलाई की शाम प्रसव समय निकल जाने (पोस्टडेट प्रेग्नेंसी) के कारण एमसीएच टोंक में भर्ती किया गया था। जांच और सोनोग्राफी में गर्भस्थ शिशु के आसपास एम्नियोटिक द्रव (पानी) की कमी मिलने पर परिजनों की सहमति से प्रसव प्रक्रिया शुरू की गई।

21 जुलाई तड़के प्रसूता ने एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और नवजात को निगरानी के लिए ऑब्जर्वेशन वार्ड में रखा गया।

जांच में सामने आया बच्चेदानी फटने का खतरा

डिलीवरी के कुछ घंटे बाद प्रसूता ने पेशाब कम आने की शिकायत की। डॉक्टरों ने तुरंत जांच की तो रक्तचाप सामान्य से कम मिला और बच्चेदानी की स्थिति भी असामान्य नजर आई। सोनोग्राफी व अन्य जांच में बच्चेदानी फटने (यूटेराइन रप्चर) और उसके आसपास खून के थक्के बनने की पुष्टि हुई। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों की सहमति से तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

विशेषज्ञ टीम ने किया सफल ऑपरेशन

डॉ. सुनीता राजोरा के नेतृत्व में प्रमुख सर्जन डॉ. निसर्ग कुलश्रेष्ठ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा गुर्जर तथा ओटी टीम के रामनरेश शर्मा, मनोज उपाध्याय और नीरज सैनी ने जटिल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी के निचले हिस्से में हुए रप्चर की सफलतापूर्वक मरम्मत की गई और जमा खून के थक्कों को भी हटाया गया।

चार यूनिट रक्त चढ़ाकर किया उपचार

ऑपरेशन के दौरान प्रसूता को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया, जबकि पूरे उपचार के दौरान कुल चार यूनिट रक्त दिया गया। कम हीमोग्लोबिन को भी रक्त चढ़ाकर सामान्य स्तर पर लाया गया। फिलहाल प्रसूता पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती है और अनुभवी चिकित्सकों की निगरानी में उपचार जारी है।

हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध

पीएमओ डॉ. प्रतीक सालोदिया ने बताया कि जिला अस्पताल और एमसीएच टोंक में हाई रिस्क गर्भवतियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक उपकरण और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से समय पर सरकारी अस्पताल में जांच और उपचार कराने की अपील की।

परिजनों ने डॉक्टरों का जताया आभार

प्रसूता की परिजन ममता मीणा ने बताया कि प्रसव के बाद कविता की हालत गंभीर हो गई थी। शुरुआत में जयपुर ले जाने का विचार था, लेकिन डॉक्टरों पर भरोसा कर ऑपरेशन की सहमति दी गई। उन्होंने कहा कि सफल ऑपरेशन के बाद मां और बच्ची दोनों सुरक्षित हैं। उनके अनुसार अब टोंक में भी जयपुर जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगी हैं, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।

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