Thu, 08 06, 2026
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वादा 33% आरक्षण का और टिकट 15% भी नहीं, 81 विधानसभा क्षेत्रों में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं:

राजस्थान की विधानसभा से लेकर देश की संसद तक महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल पास

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200 विधायकों वाली राजस्थान विधानसभा के चुनावों में महिला और युवा वोटरों की हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा होगी। टिकट बंटवारे में ये दोनों ही वर्ग घोर उपेक्षित हैं। कांग्रेस के सबसे ज्यादा टिकट 60 से ज्यादा उम्र के लोगों को बांटे गए हैं। ठीक यही स्थिति बीजेपी की भी है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के एलान से पहले देश में महिला आरक्षण को संसद में विधेयक का क्रेडिट लेने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में जबरदस्त तकरार देखने को मिली। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तक ने भाषण देकर बताया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनकी पार्टी की क्या सोच है, लेकिन विधानसभा चुनावों का एलान होते ही सियासी दावों और वादों की पोल खुल गई। महिलाओं की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही कुल 15 प्रतिशत टिकट भी महिलाओं को नहीं दिए हैं। विधानसभा चुनावों से पहले संसद में महिला आरक्षण बिल पारित कराने वाली बीजेपी ने राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिए सिर्फ 20 महिलाओं को टिकट दिए हैं। वहीं, कांग्रेस की बात करें तो इसने हालांकि 28 महिलाओं को टिकट दिए हैं। राजस्थान की विधानसभा से लेकर देश की संसद तक महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल भले ही जोर-शोर से पास किया गया हो, लेकिन राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस की ओर से महिलाओं को 15 प्रतिशत टिकट भी नहीं दिए गए हैं।
 
81 विधानसभाओं में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं
प्रदेश में इस बार के चुनाव की स्थिति यह है कि 81 विधानसभा सीटों पर एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है। चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ तो ऐसे जिले हैं, जहां पूरे जिले में ही एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।
वहीं, ऐसा लग रहा है कि स्वयं महिलाएं भी अभी मुख्य धारा की राजनीति में सक्रिय होने की बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि राजस्थान में चुनाव लड़ रहे कुल प्रत्याशियों में से महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है। प्रदेश के 200 में से 81 विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।


 

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