Thu, 08 06, 2026
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान:

NEET पेपर लीक आंदोलन में शामिल छात्रों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और छात्रों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी।

हालांकि, मेहता ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गंभीर अपराधों के आरोप में 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी भी अपराधी को बचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। अदालत प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर भी विचार कर सकती है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि पुलिस पर हमला छात्रों ने किया था या भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने।

36 दिन चला था आंदोलन

NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का आंदोलन 36 दिनों तक चला था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। बाद में 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

पहले भी दिए थे अहम निर्देश

इससे पहले 28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से रोकते हुए निर्देश दिया था कि जिन नाबालिगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। साथ ही अदालत ने संबंधित राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए थे।

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