Thu, 08 06, 2026
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बजट जारी नहीं होने से नि:शुल्क पढ़ाई पर संशय:

आरटीई के तहत अध्ययन की दूसरी किस्त विद्यालय संचालकों को अभी तक नहीं मिली

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प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2023-24 के बजट में कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को भी आरटीई के तहत निशुल्क शिक्षा प्रदान करने की घोषणा की थी। जिससे निर्धन तबके के छात्रों और उनके परिजनों में खुशी छा गई, लेकिन अब आदर्श आचार संहिता व चुनावी मौहाल के बीच निजी स्कूलों के लिए आरटीई का सरकार की ओर से फिलहाल बजट जारी नहीं होने से विद्यार्थियों की निशुल्क पढाई पर संशय बना हुआ है। परिजनों को आशंका है कि यदि चुनाव बाद नई सरकार के समय कहीं बजट घोषणा ठंडे बस्ते में चली गई तो उनको कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों की फीस भरनी नहीं पड़ जाए। बजट जारी नहीं होने से आरटीई योजना के छात्रों को अभी लाभ नहीं मिल पाया है। ऐसे में विद्यार्थियों की पुनर्भरण राशि के साथ निजी विद्यालयों में पढ़ाई भी पेशोपेश में है।
यह है मामला
आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षण व्यवस्था के लिए सरकार ने आरटीई योजना लागू कर रखी है। जिसके तहत निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर निशुल्क प्रवेश दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन राज्य सरकार ने वर्ष 2023-24 के बजट में निजी स्कूलों का दायरा बढ़ाते हुए कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक विद्यार्थियों को भी आरटीई के तहत निशुल्क शिक्षा की घोषणा की थी। जिससे आठवीं तक आरटीई के तहत निजी स्कूलों में अध्ययन कर रहे बच्चों ने आरटीई के तहत आगे की पढाई भी निजी स्कूलों में जारी रखी है, लेकिन अब सरकार द्वारा फिलहाल बजट जारी नहीं होने से संशय बना हुआ है। आरटीई के तहत अध्ययन की दूसरी किस्त विद्यालय संचालकों को अभी तक नहीं मिली है। जिससे आगे की पढाई खटाई में नजर आ रही है।
एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य प्रवीण चौधरी ने बताया कि सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कक्षा 9वीं से 12 वीं तक छात्रों के लिए आरटीई के तहत निशुल्क पढ़ाई की बजट में घोषणा की थी। लेकिन विद्यालय संचालकों द्वारा आरटीई छात्रों के आवेदन ही नहीं लिए गए तो योजना का लाभ मिलने पर संशय बना हुआ है। छात्रों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ तो राशि मिलने पर मामला अधर में है।

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