स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस के प्रोफेसर दीपांजन रॉय के नेतृत्व में चल रहे इस शोध का उद्देश्य मानव मस्तिष्क की ध्यान (Attention), स्मृति (Memory), भावनाएं (Emotion), भाषण को समझने (Speech Perception) और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता को समझना है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इंसान केवल सुनकर ही नहीं, बल्कि सामने वाले के होंठों की गतिविधियों और चेहरे के हाव-भाव देखकर भी बातचीत को बेहतर ढंग से समझता है। विशेष रूप से शोरगुल वाले माहौल में यह प्रक्रिया अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि मस्तिष्क को हल्की विद्युत उत्तेजना (Electrical Stimulation) देकर यह प्रभावित किया जा सकता है कि वह सुनी और देखी गई जानकारी को किस तरह जोड़ता है। शोधकर्ताओं ने ब्रेन वेव्स का अध्ययन करते हुए यह भी पाया कि कुछ विशेष मस्तिष्कीय तरंगें सुनने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। आईआईटी जोधपुर की टीम यह भी अध्ययन कर रही है कि ध्यान केंद्रित करने की अलग-अलग प्रक्रियाएं कार्यशील स्मृति (Working Memory) को कैसे प्रभावित करती हैं। इसके लिए EEG, MEG और आधुनिक कम्प्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस शोध का उद्देश्य उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को समझना और स्मृति ह्रास (Memory Loss), माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) तथा फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान के तरीके विकसित करना है। अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety) और ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी मानसिक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए शोधकर्ता फंक्शनल एमआरआई (fMRI) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि विभिन्न परिस्थितियों में मस्तिष्क भावनाओं को कैसे समझता और नियंत्रित करता है। इससे ऐसे न्यूरोकॉग्निटिव संकेतों (Neurocognitive Markers) की पहचान संभव हो सकेगी, जो भविष्य में मानसिक रोगों के निदान और उपचार को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। शोध में उन विशेष ब्रेन नेटवर्क और ब्रेन वेव्स की भी पहचान की जा रही है, जो अचानक सामने आने वाले खतरे पर शरीर को तुरंत सतर्क करते हैं। वैज्ञानिक यह भी समझने का प्रयास कर रहे हैं कि मस्तिष्क जरूरी और गैर-जरूरी व्यवधानों में अंतर कैसे करता है। यह अध्ययन एडीएचडी (ADHD) सहित ध्यान संबंधी विकारों के बेहतर उपचार विकसित करने में भी सहायक हो सकता है। यह शोध केवल मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इन वैज्ञानिक निष्कर्षों को समाज के लिए उपयोगी तकनीकों में बदलना भी है। भविष्य में यह शोध मानसिक स्वास्थ्य, उम्र से जुड़ी बीमारियों, संचार तकनीकों, सहायक उपकरणों और ब्रेन-इंस्पायर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रोफेसर दीपांजन रॉय ने कहा कि मानव मस्तिष्क विज्ञान की सबसे जटिल प्रणालियों में से एक है। उनका लक्ष्य यह समझना है कि मस्तिष्क जानकारी को कैसे ग्रहण करता है, अनिश्चित परिस्थितियों में कैसे निर्णय लेता है और जीवन के विभिन्न चरणों में स्वयं को कैसे अनुकूलित रखता है। उन्होंने कहा कि न्यूरोसाइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक ब्रेन इमेजिंग तकनीकों के समन्वय से भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त और संचार क्षमता को बेहतर बनाने वाली नई तकनीकों और उपचारों का विकास संभव होगा।जोधपुर। भीड़-भाड़ में किसी की आवाज सुनना मुश्किल क्यों हो जाता है? उम्र बढ़ने पर कुछ लोगों की याददाश्त बेहतर क्यों रहती है, जबकि कुछ लोग भूलने लगते हैं? अचानक खतरा सामने आने पर मस्तिष्क पलभर में कैसे सतर्क हो जाता है? ऐसे कई जटिल सवालों के जवाब तलाशने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर की कॉग्निटिव ब्रेन डायनेमिक्स लैब (CBDL) में अत्याधुनिक शोध किया जा रहा है।
शोर-शराबे में भी बातचीत समझने की क्षमता पर फोकस
याददाश्त में उम्र के असर को समझने की कोशिश
मानसिक स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में शोध
अचानक खतरे पर मस्तिष्क कैसे लेता है फैसला
स्वास्थ्य सेवाओं और AI को मिलेगा नया आधार
प्रो. दीपांजन रॉय बोले— मानव मस्तिष्क को समझना सबसे बड़ी चुनौती
देश
IIT जोधपुर में मानव मस्तिष्क के रहस्यों पर शोध, याददाश्त, भावनाओं और निर्णय क्षमता को समझने की कोशिश:
शोर में आवाज पहचानने से लेकर अचानक खतरे पर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया तक हो रहा अध्ययन, भविष्य में मानसिक रोगों के इलाज और AI को मिलेगा नया आधार
- by रितेश पारीक
- Jul 25,2026
- 250 Comments
- 2 minute read
- 3,250 Views
Popular Tags:
Related Post
Stay Connected
Popular News
Hot Categories
Subscribe To Our Newsletter
No spam, notifications only about new products, updates.
Don’t worry, we don’t spam
