Thu, 08 06, 2026
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3 दिन में 15 रुपए बढ़े प्याज के दाम, त्योहार में रुलाएगा मंहगाई के आंसू:

आवक में कमी के कारण भाव में तेजी

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फुटकर बाजार में बीते तीन दिन में प्याज के भाव 15 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बढ़े हैं। आने वाले दिनों में भाव और भी चढऩे की संभावना जताई जा रही है। बीते दिनों फुटकर बाजार में जो प्याज 20 से 25 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था। वो बुधवार को 50 रुपए तक पहुंच गया। व्यापारी बताते हैं कि आवक में कमी के चलते यह हालात देखने को मिल रहे हैं। हालात पर काबू नहीं पाया गया तो त्योहार में तो भाव 70-80 रुपए प्रतिकिलो तक भी जा सकते हैं। कोई बड़ी बात नहीं है यदि भाव इससे अधिक भी चढ़ जाएं।

बीते 10 दिनों में दो गुनी हुई रेट

बांसवाड़ा में प्याज के थोक व्यापारी प्रेम शंकर मेहता कोटा वाले बताते हैं कि बीते 10 दिनों में प्याज के भाव दो गुने से भी ज्यादा बढ़े हैं। 14-15 अक्टूबर के आसपास थोक में भाव 12-20 रुपए तक थे, जो 25 अक्टूबर को 35 से 45 रुपए तक पहुंच गए हैं। आने वाले दिनों में भाव 70 रुपए तक जा सकते हैं।

इस कारण आवक हुई कम

भारतीय किसान संघ जिला अध्यक्ष रतलाम ललित पालीवाल बताते हैं कि बारिश की अनियमितता के चलते बुवाई में डिले हुआ। इसके कारण यह समस्या देखने को मिली है। मंडी में महाराष्ट्र, कर्नाटक और अलवर से भी प्याज आता है। नीमच, मंदसौर और आसपास क्षेत्र में अभी जो पौध रोपी जा रही है। रुपाई के 60 से 70 दिन बाद उसकी फसल आएगी। लोकल प्याज आने के बाद आवक में तेजी आएगी।

आलू देगा राहत, लहसुन होगा तेज

फुटकर बाजार में अभी 20 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकने वाला आलू आने वाले दिनों में सस्ता होगा। व्यापारी मेहता बताते हैं कि आगामी दिनों में पंजाब और हरियाणा से आलू आएगा। इसलिए इसकी दरें और भी कम होगी। अप्रेल बाद यूपी का आलू आना शुरू होता है। वहीं, लहसुन के भाव में तेजी देखने को मिली सकती है। बारिश ने कराई देरी रतलाम के थामेड़ी गांव के कृषक अशोक पाटीदार ने बताया कि बीते महीनों में बारिश के कारण स्थानीय किसान प्याज की पौध तैयार नहीं कर पाए। तकरीबन डेढ माह की देरी बाद पौध तैयार की गई। जो अब तैयार हो रही है। इस नासिक बीज की प्याज की रुपाई दिसंबर के आखिरी सप्ताह में होगी। जो 60 से 70 दिन में तैयार होगी। वहीं, जनवरी में प्याज की देसी फसल की भी बुवाई की जाएगी। जो अप्रैल तक तैयार होगी। इससे ऊपज में फर्क पड़ा है। संभव है कि बड़े पैमाने पर किसान इससे प्रभावित हुए हों।

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