ग्रामीण क्षेत्र में खरीफ की सोयाबीन, मक्का व अन्य फसलों से निपटने के बाद किसान सरसों की बुवाई की तैयारियों में जुटने लगे हैं। खेतों की हंकाई-जुताई के साथ ही रेलना भी शुरू कर दिया है। लेकिन तापमान अधिक होने से किसान अब फसलों की बुवाई से पीछे हट रहे है। काश्तकारों की माने तो सरसों की बुवाई के लिए 5 से 30 अक्टूबर तक का समय उपयुक्त रहता है, लेकिन इन दिनों तापमान की अधिकता से रबी फसलों की बुवाई में तेजी नहीं आ पा रही है। हालांकि अब सुबह व शाम के तापमान में गिरावट आने से किसानों को बुवाई के गति पकड़ने की उम्मीद बंधी है।
सरसों की बुवाई ज्यादा होने का अनुमान
कृषि पर्यवेक्षक लेखराज प्रजापत ने बताया कि सरसों की बुवाई के लिए औसत तापमान 20 से 30 डिग्री होना चाहिए, लेकिन इन दिनों तापमान 35 डिग्री के करीब चल रहा है। दिन की धूप में तेजी होने से किसानों को बुवाई की चिंता सता रही है। गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर माह ही उपयुक्त रहेगा। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कम होने से सरसों की बुवाई ज्यादा होने का अनुमान है।
30 तक बुवाई का समय
सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय 30 अक्टूबर तक रहता है। इसके लिए उपयुक्त तापमान और मिट्टी में नमी जरूरी है। इन दिनों तापमान में तेजी के साथ ही बारिश की कमी से खेतों में नमी कम है। ऐसे में किसान बुवाई से पूर्व खेतों की मिट्टी में नमी के लिए सिंचाई कर रहे हैं। इससे किसानों का अतिरिक्त खर्चा हो रहा है। सिंचाई के लिए किसान दिन-रात खेतों में डेरा डाले हुए हैं।
न्यूनतम तापमान में आई गिरावट
अक्टूबर में गुलाबी सर्दी का अहसास होते ही किसान बुवाई की तैयारियों में जुट जाते हैं। दिन का तापमान उपयुक्त होते ही बुवाई शुरू हो जाती है। बुवाई के बाद नवंबर व दिसंबर में सर्दी बढ़ने पर गेहूं की फसल में फूटने शुरू होने से उत्पादन में वृद्वि होती है। जबकि सरसों में मोयले का प्रकोप नहीं होता। जनवरी के बीच सर्दी में आए निखार के बाद फसलों में रंगत शुरू होती है, लेकिन अभी तक पूरा मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है।
