Thu, 08 06, 2026
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तापमान के तेवर सरसों पर पड़ रहे भारी:

खेतों में नमी की कमी से सरसों की बुवाई हो रही प्रभावित

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इस बार मानसून की अन्तिम दौर में रही बेरुखी और इसके बाद तापमान के बढ़े तेवर अब सरसों की बुवाई पर भारी पड़ रहे हैं। इसके चलते खेतों में नमी गायब होने से अब जिले में सरसों की बुवाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में इस बार जिले में सरसों की बुवाई का रकबा कम होने की आशंका उत्पन्न हुई है। हालांकि किसानों द्वारा सरसों की बुवाई तो की जा रही है, लेकिन लक्ष्य के मुकाबले अब तक सरसों की बुवाई काफी कम क्षेत्र में हुई है। कृषि विभाग की ओर से सरसों की बुवाई का समय 25 सितम्बर से 25 अक्टूबर के मध्य माना जाता है। हालांकि किसान 31 अक्टूबर तक भी सरसों की बुवाई करते हैं।
कृषि विभाग सूत्रों के अनुसार इस बार कृषि विभाग ने जिले में कुल एक लाख 94 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में रबी बुवाई का लक्ष्य प्रस्तावित किया है, जिसके मुकाबले अब तक महज लगभग 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही बुवाई हो सकी है।
सरसों की बुवाई का आंकड़ा
पिछले वर्षों में सरसों के भावों में आए जबरदस्त उछाल के चलते जिले के किसानों की भी सरसों के उत्पादन के प्रति रुचि बढ़ी थी, जिससे जिले में सरसों की बुवाई का रकबा बढ़ गया। ऐसे में उत्पादन भी बम्पर हुआ है। बीत वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कृषि विभाग के लक्ष्य के मुकाबले अधिक हैक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की बुवाई हुई और अच्छा उत्पादन मिला था। हालांकि गत वर्ष के आंकड़ों को देखते हुए इस बार भी विभाग ने उसी अनुपात में लक्ष्य प्रस्तावित किए हैं। इस बार जिले में रबी के तहत कुल एक लाख 94 हजार 710 हैक्टेयर में बुवाई के लक्ष्य में अकेले सरसों की बुवाई का लक्ष्य एक लाख 12 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में रखा गया है।
अगले माह होगी गेहूं की बुवाई
सरसों की बुवाई के बाद गेहूं की बुवाई शुरू होती है, जिसके लिए 7 नवम्बर से समयावधि मानी जाती है। गेहूं की बुवाई 7 नवम्बर से शुरू होती है।
इधर इस बार विशेष रूप से जिले के माड़ क्षेत्र में पर्याप्त बरसात नहीं होने से कुएं बांध, तालाब आदि में पानी की कमी बनी हुई है।
नमी बिना बुवाई कार्य प्रभावित, किसानों को करनी पड़ रही सिंचाई
गुढ़ाचंद्रजी. बरसात की कमी व इस समय पड़ रही तेज धूप के कारण किसानों को सरसों की बुवाई करना मुश्किल हो रहा है। भूमि में नमी नहीं होने खेतों में धूल उड़ रही है। इस स्थिति में बिना सिचाई के बुवाई कर पाना मुश्किल हो रहा है। हर वर्ष मानसून जाने के बाद रबी की बुवाई शुरू होती है। इस दौरान खेतों में अच्छी नमी होने से किसानों को बुवाई, जुताई कार्य में आसानी रहती है। लेकिन इस बार ना तो पर्याप्त बारिश हुई ना ही अभी तापमान फसल के अनुकूल है। जिससे भूमि सूखी पड़ी है। किसानों ने बताया कि तेज धूप व नमी की कमी के कारण बुवाई धीमी चल रही है। किसानों को सिचाई करनी पड़ रही है।
तापमान नहीं अनुकूल
किसानों ने बताया कि अक्टूबर के 19 दिन निकलने के बाद भी अभी पूरी तरह बुवाई नहीं हो पाई है। बुवाई कार्य धीमी गति से चल रहा है। सरसों की बुवाई के लिए 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए, लेकिन तापमान इससे अधिक बना हुआ है। तेज धूप के कारण बीज खराब होने का अंदेशा है। ऐसे में किसान तापमान और कम होने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि नवंबर के महीने में गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है। नवंबर माह शुरू होने में दस-बारह दिन ही बचे हैं, लेकिन अभी ना तो तेज सर्दी शुरू हुई है ना ही मौसम अनुकूल हो रहा है।

 

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