खेती के माध्यम से अधिकाधिक उपज लेने के लालच में किसान बे-हिसाब कीटनाशकों का उपयोग कर उपज को तो जहरीली कर ही रहा है, साथ ही साथ खुद अपनी प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। स्थिति यह बन आई है कि अंधाधुंध कीटनाशकों के उपयोग से न केवल मनुष्यों पर ही नहीं बल्कि पशु और पक्षियों की प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रहीं है। कृषि विभाग की माने तो मारवाड़ क्षेत्र में रबी एवं खरीफ की उपज लेने के दौरान किसान करोड़ों रुपए के कीटनाशकों का फसलों पर छिडक़ाव कर देता है। विशेषज्ञों की माने तो सामान्य मनुष्य की तुलना में किसानों को स्वास्थ्य की तीन गुना अधिक गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह परेशानी केवल एक प्रदेश के किसानों की ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के किसान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
प्रजनन क्षमता पर घातक असर
शांति निकेतन की विश्व भारती यूनिवर्सिटी एवं अमेरिका की नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ में हुए अध्ययन में पाया गया है कि फ़सल कटाई के दौरान किसानों के रक्त के नमूने एकत्र कर चिकित्सा जांच की गई। इसमें किसानों की प्रजनन क्षमता पर को प्रभाव के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य को भी कमजोर पाया गया। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार सामने आया कि ऑर्गेनोफॉस्फेट से प्रजनन हार्मोन असंतुलित हो गया है यह जांच 35 स्वस्थ व्यक्तियों व 64 किसानों के स्वास्थ्य परीक्षण पर की गई।
मनुष्यों में प्रभाव
नि:संतानता मामले, भ्रूण बनाने की प्रक्रिया बाधित, जिंदा रहने की परिस्थिति में कमी, यौवन काल की जल्द विदाई ,स्पर्म क्रोमेटिंग में क्षति, वीर्य क्वालिटी क्वांटिटी में कमी, प्रजनन हार्मोन असंतुलित, वृषण व अंडाशय का विकास बाधित हो रहा है। इसी तरह पक्षियों में अंडा निर्माण में कमी, अंडा सेने में असमर्थता, अंडे का कवच पतला, पक्षियों का अजीब व्यवहार, प्रजनन क्षमता में कमी, प्रजनन समय अनियमित, असामान्य यौवन काल, सेक्सुअल व्यवहार व क्षमता में कमी।
