किसानों का रुझान परंपरागत खेती के साथ अब अन्य फसलों की ओर भी बढ़ने लगा है। यह किसानों के लिए लाभप्रद साबित हो रहा है। अलावड़ा कस्बे के नंगली गांव के एक किसान परिवार की जिंदगी भी अब फूलों की सुगंध से महकने लगी है।
दरअसल नंगली गांव के किसान अब पारंपरिक फसलों की खेती के साथ गेंदे की खेती कर रहे हैं। अलावड़ा नंगली गांव के किसान हरकिशन के पुत्र राजकुमार सैनी ने बताया कि पहले उनके परिवार के लोग परंपरागत खेती करते थे। जिससे मेहनत अधिक लेकिन ज्यादा उत्पादन नहीं होता था। इब्दिता संस्था में कार्यरत डॉ. राजेश अग्रवाल व जगराम चौधरी ने फूलों की खेती उसे सलाह दी। इस पर एक बीघा खेत में गेंदा के फूल की खेती की। इसकी रोपाई से लेकर तुड़ाई तक का सारा काम स्वयं ही करते हैं। परिवार की महिलाएं व बच्चे भी इसमें सहयोग करते हैं। बिक्री के लिए फूलों को शहरों के मार्केट ले जाते हैं। गेंदा, गुलदाउदी आदि फूलों की खेती कर किसान अच्छा मुनाफे कमा रहे है। एक बीघा में 80 से 90 हजार का मुनाफा हो रहा है।
डेढ़ दशक से जल संकट : करीब 15 सालों में क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर की कमी के चलते लोगों के लिए फसल उत्पादन में परेशानी आ रही है। ऐसे में कम पानी व कम लागत में अधिक पैदावार व आमदनी वाली सब्जी व फूलों की खेती की जाने लगी है। राजकुमार सैनी ने बताया कि फूलों की खेती करीब 3 साल से कर रहे हैं। हर त्योहार व शादी समारोह के दौरान दिल्ली व जयपुर, अलवर, रामगढ़, हरियाणा सहित यहां पर व्यापारी फूल खरीदने आते हैं।
