Thu, 08 06, 2026
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अन्नदाताओं ने उठाया कर्ज माफी और अनुदान का मुद्दा:

फसल बीमा का मिले पूरा भुगतान

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चुनाव को लेकर हर कोई उत्साहित है, लेकिन अन्नदाताओं में आक्रोश नजर आ रहा हैं। राजस्थान पत्रिका के किसान चौपाल में किसानों का सरकारों के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला। किसानों ने कहा कि सरकारें चुनाव से पहले किसानों के लिए अनेक वादें करती हैं, लेकिन चुनाव के बाद वादें पूरा नहीं हो पाने से अभी तक किसानों कि स्थिति नहीं सुधर पाई हैं। चौपाल में किसानों ने कर्ज माफी, अनुदान, एमएसपी, खाद-बीज की समस्या, पानी, आवारा पशुओं, भूमि अधिग्रहण सहित अनेक मुद्दों को लेकर विचार व्यक्त किए।
सियासत के बीच उलझी ईआरसीपी, बंजर हो रही ज़मीन: किसान चौपाल में स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा ईआरसीपी का मुद्दा गूंजा। किसानों ने कहा कि ईआरसीपी सियासत के बीच उलझकर रह गई हैं। जहां कांग्रेस द्वारा केन्द्र सरकार से ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग उठाई रही है, वहीं केन्द्र की भाजपा सरकार ईआरसीपी की डीपीआर संशोधन करने की बात कहती नजर आती हैं।
क्षेत्र में पेयजल के साथ सिंचाई पानी की सबसे बड़ी समस्या हैं। सिंचाई का पानी की कमी के चलते जमीन बंजर होती जा रही हैं। लोगों को अन्न उगाकर देने वाले किसानों के सामने खाद्यान्न का संकट पैदा हो गया है। 
चौपाल के दौरान मुखर होकर बोले किसान
चौपाल में किसान विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को लेकर मुखर नजर आए। सुनघाडी निवासी रतनसिंह गुर्जर ने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून अभी तक नहीं लाया गया। साथ ही एमएसपी पर राज्य सरकार की ओर से भी अधिक बोनस दिया जाना चाहिए। जिससे किसानों को अपनी मेहनत की पूरी कीमत मिल सके। बीघोता निवासी किसान छोटेलाल गुर्जर ने कहा कि खाद-बीज को लेकर किसान हमेशा चिंतित रहता हैं। अधिकांश समय खाद की किल्लत झेलनी पड़ती हैं। इसके चलते किसान चाहते हुए भी अच्छी फसल उत्पादन करने में असमर्थ नजर आते हैं। किसान केदार प्रसाद शर्मा ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर सियासत हो रही है। इसके चलते यह योजना अटक गई हैं। जो कि धरातल उतरती नजर नहीं आ रही है। श्यालावास के किसान मनीष ने कहा कि खाद बीज की हमेशा कालाबाजारी रहती हैं। दुकानदार खाद-बीज के मनमर्जी से दाम वसूलते हैं। जिससे किसानों की जेब कटती हैं। नांगल झामरवाडा़ निवासी गिर्राज प्रसाद ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के समय किसानों को जमीन के बहुत ही कम पैसे दिये जाते हैं। डीएलसी दरों में वृद्धि करते हुए भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन किया जाना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार को भी किसानों को अनुदान देना चाहिए। बसवा निवासी ज्ञान सैनी ने कहा कि किसान आवारा पशुओं से परेशान हैं। किसानों को तारबंदी के लिए शत प्रतिशत अनुदान दिया जाना चाहिए। अनंतवाडा़ निवासी किसान मूलचंद सैनी कहना है कि पेयजल के साथ साथ किसान के सामने सिंचाई के पानी का संकट हैं। सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

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