इन दिनों धीरे-धीरे सर्दी का मौसम आने लगा है तो किसान रबी की फसल की बुवाई के लिए अपने खेत तैयार करने लगे हुए हैं। दूसरी ओर किसानों को आज भी कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध करवाए जा रहे अनुदानित बीज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
उपखंड क्षेत्र के अधिकतर गांवों में रबी फसल की बुवाई में जीरा, ईसबगोल ,रायड़ा व गेहूं आदि की बुवाई होती है, लेकिन कृषि विभाग की ओर से केवल सोयाबीन व अन्य सब्जियों के बीच वितरित किए जा रहे हैं या अधिकतर क्षेत्र में जीरा ईसबगोल अधिक होने के कारण किसानों को महंगे दामों में निजी केंद्रों से बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन अधिकारी किसानों को अनुदानित बीज उपलब्ध करवाने के प्रति गंभीर नहीं हैं।
चक्कर काटने को मजबूर किसान
रबी की फसल बुवाई से पूर्व किसान खेतों की हकाई, जुताई और खाद बीज की तैयारी के लिए दुकान और मार्केटिंग सोसायटी पर पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों को खाद और बीज नहीं मिल रहा है। अनुदानित बीज नहीं आने के कारण किसानों को बाजार में उपलब्ध बीज खरीदने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। किसान हर समय अनुदानित बीज के लिए केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यहां पर विभाग की ओर से अभी तक किसी भी क्षेत्र में बोई जाने वाली फसल का बीज नहीं पहुंचा है।
अनुदानित बीज मिले तो किसानों को राहत मिले
गौरतलब है कि सरकार की ओर से रबी फसल के सीजन में गेहूं, चना व सरसों के बीज अनुदान उपलब्ध करवाए जाते हैं, लेकिन इस बार लूनी नदी में पानी की अधिक आवक होने के कारण किसान अधिक हैक्टेयर में जीरा ,ईसबगोल व रायड़ा की बुवाई करेंगे, जिससे किसानों को सरकार की ओर से बीज उपलब्ध करवाया जाता है तो किसानों को राहत मिलेगी। वहीं जीरे के भाव अधिक होने के कारण किसानों को जीरा खरीदना मुश्किल हो रहा है।
