Thu, 08 06, 2026
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पशुओं को नहीं मिल पाया सुरक्षा कवच, आचार संहिता में अटकी पशु बीमा योजना:

योजना शुरू होने के अगले दिन पशु चिकित्सक चले गए थे हड़ताल पर

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विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में आचार संहिता लागू से पशुओं के लिए शुरू की कामधेनु पशु बीमा योजना मझधार में अटक गई। योजना की शुरूआत के अगले दिन अपनी मांगों को लेकर पशु चिकित्सक हड़ताल पर चले गए थे। बाद में कामकाज पर लौटे लेकिन बीमा कंपनी की ओर से ब्लॉक पशु मित्र नियुक्त नहीं होने से पशुओं का बीमा नहीं हो पाया है। प्रदेश में आचार संहिता लागू होने से पशुपालन विभाग को अब उच्चाधिकारियों से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है। पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पशुओं का बीमा करने के लिए सरकार ने कंपनी को अधिकृत किया था। उक्त कंपनी को जिले में ब्लॉक स्तर अपने एजेंट नियुक्त करने थे। कंपनी के एजेंटों के माध्यम से ही जिले में रजिस्ट्रेशन कराने वाले पशुपालकों के पशुओं का बीमा करना था। पशुपालन विभाग की ओर से कंपनी को अधिकृत करने के बावजूद ब्लॉक स्तर पर बीमा एजेंटों की नियुक्ति नहीं की। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एजेंटों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की तो इसी दौरान आचार संहिता लग गई। इतना ही नहीं पशुपालन विभाग के पशुधन सहायकों को प्रशिक्षण भी नहीं दिया है।
इस कारण बीमा योजना का मामला मझधार में चला गया। मुख्यमंत्री की ओर से बीते दो माह पूर्व अगस्त में कामधेनु बीमा योजना की घोषणा की थी। लेकिन योजना लागू होने के बाद ही पशु चिकित्सक अपनी एनपीए की मांग को लेकर सभी हड़ताल पर चले गए थे। जिसके कारण गोवंश के भौतिक सत्यापन का कार्य व चारे का अनुदान अटक गया था। इससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकार की ओर से मांगे मानने के बाद पशु चिकित्सक वापस काम पर लौट आए। लेकिन बीमा योजना की प्रक्रिया आगे नही बढ़ पाई। प्रदेश सरकार ने पशुपालकों के लिए पशुबीमा योजना शुरू करके अच्छा किया। लेकिन अभी तक ये शुरू नहीं हो सकी। जिससे बीमा के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
गुड्डी 
महंगाई राहत शिविर में पहुंचकर कामधेनु बीमा योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन अभी तक योजना शुरू नहीं की गई। पहले पशु चिकित्सक हड़ताल पर पहुंच गए थे।
अनीसा
महंगाई राहत शिविर में कराए थे पंजीकरण
बीते कुछ माह पहले मुख्यमंत्री ने महंगाई राहत शिविर में राहत देने वाली दस से अधिक योजनाओं को शामिल किया था। इसमें मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना भी शामिल थी। इस योजना के माध्यम से दुुधारू पशुओं का बीमा किया जाना है। एक परिवार से अधिकतम दो-दो दुधारू पशुओं का बीमा कवर होना था। दुधारू पशुओं की मृत्यु पर अधिकतम 40 हजार प्रति पशु बीमा मिलना था। इस बीमा योजना में वार्षिक आठ लाख रुपए आय वाले पशुपालकों को शामिल किया है।

 

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