प्रदेश में गोवंश की दशा सुधारने के लिए लम्बे समय से मनरेगा से जोड़ने की मांग हो रही है। हालांकि सरकार ने अब तक इस और ध्यान नहीं दिया है, लेकिन गोशालाओं का अनुदान बढ़ाकर 9 महीने जरूर कर दिया। अब जब चुनाव हो रहे हैं तो मुख्यमंत्री ने दुबारा सरकार बनने पर दो रुपए किलो गोबर खरीदने की घोषणा की है। यदि सरकार ने गोबर खरीदना शुरू किया तो सबसे ज्यादा फायदा नागौर जिले को होगा। यहां न केवल प्रदेश की सर्वाधिक गोशालाएं हैं, बल्कि गोवंश के साथ अन्य पशु भी ज्यादा हैं, जिनका गोबर पशुपालकों की आर्थिक स्थिति बदलने का काम कर सकता है।
प्रदेश में कुल 3870 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 12 लाख, 56 हजार 70 गोवंश वर्तमान में है। यदि नागौर जिले (डीडवाना कुचामन सहित) की बात करें तो यहां 699 गोशालाएं हैं और इनमें 2 लाख, एक हजार, 402 गोवंश हैं। डीडवाना-कुचामन को अलग भी करें तो यहां 423 गोशालाएं हैं, जिनमें 1.40 लाख गोवंश है। यानी पूरे प्रदेश में सबसे अधिक गोशालाएं और गोवंश नागौर जिले में है। जिले में कुल गोवंश की बात करें तो साढ़े 4 लाख से अधिक है, वहीं साढ़े 5 लाख से अधिक भैंसवंश, करीब छह लाख भेड़, करीब 14 लाख बकरी तथा 10 हजार के करीब ऊंट सहित अन्य पशु भी हैं।
गोबर व गोमूत्र से बने उत्पाद
पशुपालन विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि गोबर खरीद के साथ सरकार को गोबर व गोमूत्र के उत्पाद बनाने पर ध्यान देना चाहिए। आज प्रदेश में कुछ गोशालाएं ऐसी हैं, जो गोबर और गोमूत्र को बेचकर आत्मनिर्भर बनी हुई हैं। भीलवाड़ा की माधव गोशाला इसका बड़ा उदाहरण है, जिसकी खुद की आय लाखों में है। कुछ गोशालाओं में गोबर से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। यदि सरकार इस ओर ध्यान देकर योजनाबद्ध काम करे तो गोवंश की दशा सुधर सकती है।
गोशालाओं की आय बढ़ेगी
यदि सरकार गोबर की खरीद करती है तो गोशालाओं की आय बढ़ेगी, जिससे गोशालाओं की दूसरों पर निर्भरता कम होगी।
रामजीवण सांखला, संरक्षक, मुरलीधर गोसेवा आश्रम समिति, भदवासी
