राज्य सरकार की ओर से भले ही किसानों को खेती में अनुदान देकर कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा हो, लेकिन कृषि जिंसों के बाजार के अभाव में किसानों को पड़ौसी राज्य गुजरात में माल बेचना पड़ रहा है। किसानों की उपज सीधे गुजरात मंडी जाने से गुजरात सरकार को टैक्स में फायदा हो रहा है।
नर्मदा नहर आने के बाद में सूखी व बंजर पड़ी जमीन में पैदावार होने से किसानों को उपज में भले ही इजाफा मिला हो, लेकिन कृषि उपज बेचने के लिए यहां पर बाजार उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कुछ किसान तो कम दाम में आढतियों को उपज बेच देते है। वहीं ज्यादातर किसानों को उपज बेचने के लिए गुजरात की मंडियों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में राजस्थान सरकार से अनुदान प्राप्त किसानों का अनाज गुजरात की मंडियों में बिक रहा है। जिससे गुजरात सरकार को टैक्स से फायदा मिल रहा हैं।
औने पौने दाम में बेचते है अनाज
किसानों को खेती की उपज से अनाज को मंडी के अभाव में औने पौने दाम में बेचना पड़ता है। किसानों की मजबूरी का फायदा आढ़तिएं उठा रहे है। मंडी और उपज के लिए उचित बाजार के अभाव में किसानों को कम दाम में उपज बेचनी पड़ती है। वहीं कई किसान अपनी उपज बेचने के लिए गुजरात की मंडियों में लेकर जाते है। जिससे गुजरात सरकार को टैक्स मिल रहा है।
राजस्थान सीमा पर गुजरात की निजी मंडियां
राजस्थान में किसानों के उपज का अनाज को बेचने के लिए बाजार नहीं होने का फायदा गुजरात उठा रहा है। गुजरात के कई व्यापारी राजस्थान की सीमा पर मंडी खोलकर यहां के किसानों से अनाज की खरीद करते है। ऐसे में सांचौर जिले की सीमा पर नेनावा, पीलूड़ा, थराद, धानेरा, डीसा व ऊंझा की मंडियों में राजस्थान के किसान अपनी उपज बेचने के लिए जाते है।
इनका कहना...
हमारी जी तोड़ मेहनत करके कृषि उपज लेते है। लेकिन आसपास में कोई मंडी नहीं है। मेहनत से कृषि उपज को बेचने के लिए बाजार नहीं होने से गुजरात की मंडियों में मजबूरन बेचने जाना पड़ता हैं।
-शान्तिलाल पुरोहित,प्रेमाराम लोमरोड किसान
