Thu, 08 06, 2026
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इजरायल की तकनीक से घर के कमरे में कश्मीर की केसर का ले रहे उत्पादन:

घर के कमरे को लैब बनाकर शुरू किया केसर का उत्पादन

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कश्मीर बर्फीली वादियों-चिनार के दरख्त, सैर-सपाटे के अलावा केसर के लिए विख्यात है। वहां की केसर की महक अब अजमेर में भी फैल रही है। इजरायल की तकनीक से यश मिश्रा व उनके भाई अंकुश मिश्रा ने यह नवाचार किया है। उन्होंने घर के कमरे को लैब बनाकर केसर का उत्पादन शुरू किया है। युवा डाटा साइंटिस्ट यश व उनके भाई एक डिजाइनर कंपनी के मालिक अंकुश घर के कमरे में लैब बनाकर केसर के उत्पादन में जुटे हैं। उन्होंने इजरायल से अपने दोस्तों से तकनीक सीखकर घर में कश्मीर जैसा कृत्रिम वातावरण तैयार किया है। यश ने पत्रिका को बताया कि ईरान की केसर को देश में कई कम्पनियां कश्मीर की केसर के रूप में बेच रही हैं। उन्होंने बताया कि करीब 4 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट कर तकनीक से केसर का उत्पादन कर रहे हैं।

मिट्टी-पानी की नहीं जरूरत

यश ने बताया कि ऐरोफॉनिक तकनीक से केसर को एक कमरे में उगाया जा रहा है। इस तकनीक में मिट्टी पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। केसर को ह्यूमिडी फायर तकनीकी के तहत कई लेयर बनाकर उगाया जा रहा है। कश्मीर के ठंडे वातावरण को बनाए रखने के लिए करीब डेढ़ टन का वातानुकूलित संयंत्र लगाया गया है। इससे केसर को सही ग्रोथ मिलती है।

दस साल तक ले सकते हैं उत्पादन

घर में तैयार लैब में दस से बारह साल तक केसर का उत्पादन लिया जा सकता है। केसर के फूल को नवम्बर में ह्यूमिडी फायर तकनीक के तहत बोया जाता है। जुलाई तक इसके फूल निकलते हैं। सही तापमान और रखरखाव के चलते केसर का उत्पादन यथावत रहता है।

यश ने इजरायल और ईरान स्थित दोस्तों से कृत्रिम केसर उत्पादन की जानकारी ली। इसके अलावा शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी के सेफ्रन विभाग से कई विषयों की जानकारी ली। वीडियो सर्च करने के अलावा वैज्ञानिक पद्धति के बारे में अध्ययन किया। इसके बाद वह केसर उत्पादन शुरू कर पाए हैं।

वहां मची उथल-पुथल, यहां उगा रहे केसर

इजराइल हमास संघर्ष के चलते जहां इजराइल में युद्ध का माहौल बना है और उथल-पुथल मची है, वहीं उनकी तकनीक से अजमेर के युवा दो भाई घर के कमरे में बनाई लैब में केसर का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह तकनीक बहुत कारगर है। इसमें घर पर ही अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

 

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