कुडग़ांव कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में टमाटर की फसल कमजोर हो रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण किसानों का टमाटर की खेती से रुझान कम हो रहा है। जिससे टमाटर की खेती का रकबा बहुत कम रहा गया है। जिससे कुडग़ांव क्षेत्र टमाटर की खेती में पहचान खो रहा है। गत 5 वर्षों से टमाटर की पैदावार कुड़गांव क्षेत्र में बहुत कम रहा गई है।
रकबा हुआ कम
कुड़गांव सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों करीब एक दशक पहले 150 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि में टमाटर की पैदावार होती थी। यहां का टमाटर गुणवत्तापूर्ण होने से पंजाब, दिल्ली, हरियाणा तक भेजा जाता था, लेकिन कुछ वर्षों से पैदावार कम होने से किसानों की आमदनी भी घटी है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में टमाटर का रकबा मात्र 20 से 25 हैक्टेयर ही रह गया है। पूर्व में बाहर के बड़े व्यापारी यहां टमाटर खरीदने आते थे। लेकिन अब पैदावार कम रह जाने से व्यापारी भी नहीं आते हैं। जिससे टमाटर की खेती से जुड़े लोगों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है।
नहीं मिलता अनुदान
किसानों ने बताया कि टमाटर की फसल में रोग अधिक लगता है। रोग से बचाव के लिए सरकार की ओर से ना कीटनाशक मिलता है ना अन्य सुविधा। ऐसे में किसानों ने टमाटर की खेती करना कम कर दिया है। टमाटर में मुख्य रूप से झुलसा रोग लगता है। ऐसे में किसानों का टमाटर की खेती से रुझान कम हो रहा है। मंडावरा गोकलपुर, खूबपुरा, डाबरा, डिकौली, खेड़ा आदि में टमाटर की खेती होती है।
