Thu, 08 06, 2026
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खेतों में फैलेगी सौंफ की सुगंध, खेती को बढ़ावा देने का प्रयास:

खेती में नवाचार करने वाले किसानों को दे रहे ट्रेनिंग: जिले में सौंफ की खेती को प्रोत्साहित करने का प्रयास

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आने वाले दिनों में हनुमानगढ़ जिले के खेतों में सौंफ की सुगंध फैलेगी। इसके लिए कृषि विभाग की टीम किसानों को प्रोत्साहित करने जा रही है। इसकी बिजाई को लेकर जिले की आबोहवा काफी अच्छी बताई जा रही है। खेती में नवाचार करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। चालू रबी सीजन में जिले में किसान इसकी बिजाई करते हैं तो प्रति बीघा 5 -7 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में कुछ किसानों का सौंफ की खेती का बरसों पुराना तर्जुबा है। सौंफ की खेती भारी ,चिकनी, बलुई मिट्टी की अपेक्षा दोमट में ठीक रहता है। 190 दिन में होने वाली उक्त फसल की बिजाई को लेकर किसानों को जानकारी दी जा रही है। इस फसल की बिजाई केवल अक्टूबर में की जाती है।
कीटों का प्रबंधन ऐसे
सौंफ की फसल में रस चूसक कीटों के प्रकोप की आशंका रहती है। इस पर डाइमथोएट या मेलाथियन का छिड़काव किया जा सकता है। इससे काफी हद तक रोकथाम की उमीद रहती है। इस फसल में मुय उर्वरक सरसों फसल की भांति उपयोग करके उत्पादन प्रति बीघा पांच से सात क्विंटल लिया जा सकता है।
इतनी रखें बीज की मात्रा
सौंफ की खेती में बिजाई के वक्त बीज की मात्रा अधिकतम 2.5 किलो /बीघा रखना चाहिए। बीज छिटक कर हल्की मिट्टी से ढके, छिटकवा विधि ज्यादा कारगर है। इसकी खेती में बिजाई से पहले बीजोपचार को जरूरी बताया जा रहा है। खरपतवार नियंत्रण के लिए सरसों की भांति पेंडिमेथालिन का प्रयोग बुआई के 1 -2 दिन बाद किया जा सकता है।


 

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