रात के तापमान में गिरावट आने से सर्दी ने जोर पकड़ा है। जिससे मौसम सरसों की बुवाई के लिए अनुकूल होने लगा है। ऐसे में सरसों की बुवाई ने गति पकड़ ली है। समीप के जहांनगर मोरड़ा सहित कई गांवों में सरसों की बुवाई चल रही है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष सरसों की बुवाई देरी से चल रही है। हालांकि बुवाई के लिए पहले खेतों में सिंचाई करनी पड़ रही है। क्योंकि भूमि में नमी पर्याप्त नहीं है। लेकिन रात के समय ठंडक बढऩे से फसल को सम्बल मिलेगा। सिंचाई के बाद भूमि में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी। जिससे बीज खराब होने की आशंका नहीं रहेगी। गांवों में महिलाएं सुबह से शाम तक खेतों में बुवाई कार्य में लगी रहती है। उल्लेखनीय है कि सरसों की बुवाई का समय 31 अक्टूबर तक रहता है।
अगले माह से गेहूं की होगी बुवाई
नवंबर माह से गेहूं की बुवाई भी शुरू हो जाएगी। गेहूं केलिए तेज सर्दी की जरूरत रहती है। ऐसे में नवंबर में तापमान में और गिरावट आने के साथ ही गेहूं की बुवाई कार्य शुरू हो जाएगा। मौसम विभाग ने एक-दो दिन में बूंदाबांदी की आशंका भी जताई है। ऐसे में सर्दी और बढऩे से फसल केा फायदा होगा। जैसे-जैसे सर्दी तेज होगी फसल में रंगत आने लगेगी।
बीजों का होने लगा अंकुरण
तापमान में गिरावट के बाद सर्दी बढ़ी है। जिससे सरसों की फसल को संबल मिल रहा है। कुछ किसानों ने करीब पन्द्रह दिन पहले खेतों में सिंचाई कर सरसों की बुवाई कर दी थी। जिससे उनकी फसल अब अंकुरित होने लगी है। किसानों ने बताया कि सर्दी बढऩे से फसल में रंगत आएगी। यदि इस दौर में बरसात हो जाती है तो वह फसल के लिए अमृत का कार्य करेगी। बरसात की कमी से जलस्रोतों में पानी की कमी तो है, लेकिन किसान नलकूपों के माध्यम से सिंचाई कर सरसों की खेती कर रहे हैं।
