Thu, 08 06, 2026
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यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में ₹4.41 करोड़ का घोटाला, डिप्टी मैनेजर समेत 6 पर CBI की FIR:

31 फर्जी मोटर इंश्योरेंस क्लेम पास कर कंपनी को लगाया करोड़ों का चूना, आरोपी डिप्टी मैनेजर लापता

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कोटा। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के कोटा स्थित मोटर थर्ड पार्टी हब में करीब 4.41 करोड़ रुपए के फर्जी इंश्योरेंस क्लेम घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले में कंपनी के डिप्टी मैनेजर बृजेश मीणा सहित छह लोगों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में चार एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। आरोप है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच 31 फर्जी मोटर दुर्घटना बीमा क्लेम स्वीकृत कर कंपनी को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया।

कंपनी ने करीब 15 दिन तक अपनी विजिलेंस टीम से जांच कराई। आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर क्षेत्रीय प्रबंधक तेजिंदर सिंह और डिप्टी जनरल मैनेजर आलोक कुमार जैन की स्वीकृति के बाद जयपुर स्थित सीबीआई कार्यालय में चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई।

3 जुलाई को हुआ ट्रांसफर, जॉइन नहीं किया

कंपनी ने डिप्टी मैनेजर बृजेश मीणा का 3 जुलाई को मुंबई तबादला कर दिया था, लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल लापता हैं और उनका मोबाइल फोन भी बंद है। सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कोर्ट ने राहत दी, फिर भी जारी कर दिए 15 लाख

जांच में सामने आए एक मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) बूंदी ने स्पष्ट किया था कि संबंधित बीमा पॉलिसी में खलासी का बीमा कवरेज शामिल नहीं था, इसलिए कंपनी पर मुआवजा देने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी। इसके बावजूद कथित मिलीभगत से 15 जून 2026 को 15 लाख रुपए का क्लेम स्वीकृत कर भुगतान कर दिया गया।

कोर्ट में मामला ही नहीं, फिर भी 14.55 लाख का भुगतान

एक अन्य मामले में लोकेश कुमार सेन के नाम से 14.55 लाख रुपए का क्लेम स्वीकृत किया गया। जांच में पता चला कि संबंधित मामला अदालत में दर्ज ही नहीं था। आरोप है कि फर्जी MACT अवॉर्ड तैयार कर उसी दिन नोटिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

NEFT की जगह जारी किए चेक

सीबीआई में दर्ज शिकायत के अनुसार कंपनी के नियमों के तहत सभी भुगतान NEFT के माध्यम से किए जाने चाहिए थे, लेकिन आरोप है कि डिप्टी मैनेजर बृजेश मीणा लगातार चेक के जरिए भुगतान करते रहे। ऑडिट के दौरान पूछताछ में उन्होंने इसे अदालत के आदेश का हवाला देकर उचित बताया।

फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर परिचितों के खातों में पहुंचाई रकम

विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कंपनी के GC Core System में फर्जी क्लेम तैयार किए। जिन मामलों में अदालत ने बीमा कंपनी को राहत दी थी या क्लेम खारिज कर दिया था, उनमें भी बैकडेट में फर्जी चेक जारी किए गए। कई मामलों में ई-कोर्ट पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने के बावजूद कथित रूप से असली दावेदारों के बजाय आरोपियों के परिचित लोगों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी गई।

सीबीआई अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि जिन खातों में फर्जी भुगतान पहुंचा है, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।

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