Thu, 08 06, 2026
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जयपुर कैब ड्राइवर हत्याकांड का खुलासा: नई कार लूटने के लिए रची साजिश, 2 आरोपी गिरफ्तार:

कैफे खोलने के लिए चाहिए थे पैसे, 2025 मॉडल की कैब देखकर चुना शिकार, रस्सी से गला घोंटकर चाकू से की हत्या

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जयपुर। हरमाड़ा थाना क्षेत्र में चेतन डूंगरी के पास जंगल में मिले कैब चालक के शव के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुरलीपुरा निवासी सुधांशु जांगिड़ और मूल रूप से दौसा के बांदीकुई निवासी सोनू बैरवा के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों नई कार लूटकर उसे बेचने और उससे मिले पैसों से कैफे खोलना चाहते थे।

एक सप्ताह पहले शुरू की थी हत्या और लूट की तैयारी

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने वारदात से करीब एक सप्ताह पहले ही योजना बना ली थी। उन्होंने विद्याधर नगर के एक मार्ट से दो चाकू खरीदे, ऑनलाइन रस्सी मंगवाई और वाहन की जानकारी जांचने वाला मोबाइल एप डाउनलोड किया।

21 जुलाई की रात दोनों ने कैब बुक करनी शुरू की। एप के जरिए कार का मॉडल देखकर पुरानी गाड़ियों की पांच राइड रद्द कर दीं। छठी बार 2025 मॉडल की नई कार मिलने पर उसी कैब को बुक किया।

सुनसान जगह ले जाकर चालक की हत्या

रात करीब दो बजे दोनों आरोपी कैब में सवार होकर चालक को राजावास की ओर ले गए। रास्ते में दो बार सामान खरीदने के बहाने कार रुकवाई। सुनसान स्थान पर पहुंचने के बाद पीछे बैठे आरोपी ने रस्सी से चालक का गला घोंट दिया, जबकि आगे बैठे आरोपी ने पेट और छाती पर चाकू से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को जंगल में फेंककर कार लेकर फरार हो गए।

कार दौसा में छिपाई, पहचान बदलने के लिए कटवाए बाल और दाढ़ी

डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि हत्या के बाद आरोपी कार को दौसा ले गए और एक परिचित के यहां छिपाकर ट्रेन से जयपुर लौट आए। पहचान छिपाने के लिए दोनों ने जयपुर पहुंचते ही बाल और दाढ़ी कटवा ली।

इधर, सुबह एक महिला की सूचना पर पुलिस जंगल पहुंची। मृतक के पास कोई मोबाइल या पहचान पत्र नहीं मिला। पुलिस ने एआई तकनीक की मदद से चेहरे को स्पष्ट कर पहचान का प्रयास किया।

एआई तकनीक से हुई मृतक की पहचान

जांच में मृतक की पहचान 34 वर्षीय लखपत सिंह के रूप में हुई, जो मूल रूप से धौलपुर के रहने वाले थे और विद्याधर नगर में रहकर टैक्सी चलाते थे। इससे पहले वह मुंबई में ड्राइवर के रूप में काम कर चुके थे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

टोल ट्रांजेक्शन से मिला अहम सुराग

पुलिस ने कार की लोकेशन ट्रेस की तो पता चला कि वह बस्सी टोल पार कर चुकी थी। टोल प्लाजा के ट्रांजेक्शन और सीसीटीवी फुटेज की जांच में एक आरोपी का मोबाइल नंबर मिला। लोकेशन के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

70 पुलिसकर्मियों की टीम ने किया खुलासा

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के निर्देशन में एसएचओ नरेंद्र भड़ाना, डीएसपी प्रभारी गणेश सैनी सहित करीब 70 पुलिसकर्मियों की एक दर्जन टीमें गठित की गई थीं। कार्रवाई में पुलिस अधिकारियों बहादुर सिंह और राजमहेंद्र सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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