राजस्थान में 23 नवंबर को चुनाव की घोषणा होने के बाद बीजेपी ने पहले बाजी मारते हुए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में 41 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतरा है इसमें देवली उनियारा विधानसभा सीट से कर्नल किरोड़ी बैंसला के बेटे विजय बैंसला को मौका दिया है। इस बार भी बीजेपी ने स्थानीय उम्मीदवार की प्राथमिकता को दरकिनार किया है। विजय बैंसला को देवली उनियारा विधानसभा सीट से उतारे जाने को लेकर सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इस बीच सियासी गलियारों में बीजेपी के इस कदम को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की समीकरणों को प्रभावित करना माना जा रहा है। पायलट के बाद गुर्जरों के दूसरे सबसे बड़े नेता विजय बैसला को मौका देकर बीजेपी टोंक विधानसभा सीटों की समीकरणों से जोड़कर देख रही है। इसके पीछे बीजेपी की बड़ी रणनीति मानी जा रही है। अब तक देवली उनियारा विधानसभा सीट का इतिहास रहा है, यहां एक भी विधायक दूसरी बार रिपीट नहीं हुआ है। लिहाजा इस गणित को देखते हुए भाजपा ने टोंक के चार विधानसभा सीटों पर गुर्जर मतदाताओं को साधने की बड़ी कोशिश की है।
विजय बैसला को टिकट देकर पायलट को घेरने की कोशिश
अब तक बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में देवली-उनियारा विधानसभा सीट के उम्मीदवार हमेशा देर से घोषित किए हैं। लेकिन इस बार पहली लिस्ट में उम्मीदवार घोषित कर बीजेपी ने सबको चौका दिया है। इसके पीछे बीजेपी की बहुत बड़ी राजनीति मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार बैंसला को टिकट देने के पीछे गुर्जर नेता सचिन पायलट को बीजेपी कहीं न कहीं घेरने की कोशिश कर रही है। क्योंकि टोंक विधानसभा में मुस्लिम के बाद दूसरा बाहुल्य गुर्जर समाज है। जहां गुर्जर समाज के करीब 40 हजार मतदाता है। ऐसी स्थिति में पायलट की समीकरणों को प्रभावित करने के लिए विजय बैंसला का टिकट देवली उनियारा से दिया जाना माना जा रहा है। जबकि इसके पहले बीजेपी ने दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी को टोंक जिले का प्रभारी बनाया है। जो गुर्जर समाज से आते हैं। ऐसे में गुर्जर मतदाताओं में तोड़फोड़ करने के लिए बिधूड़ी को जिला प्रभारी बनाने का कारण माना जा रहा है।
देवली उनियारा विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
23 नवंबर को होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की समीकरण की बिसाते जमने लगी है। इस दौरान चुनाव के दिन देवली उनियारा विधानसभा सीट के 2 लाख 96 हजार मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। वर्ष 2018 के चुनाव को लेकर नजर डालें तो, इस बार 31,446 नए मतदाता चुनाव में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा विधानसभा सीट के लिए चुनाव आयोग ने 296 बूथ बनाएं हैं। जहां पर मतदाता अपने वोट डालेंगे। इनमें अगर वर्गीकरण की बात की जाए तो, गुर्जर मतदाता - करीब 50 हजार, मीणा- करीब 56 हजार, माली - 25 हजार, राजपूत - 23 हजार, ब्राह्मण - 27 हजार, वैश्य - 27 हजार, अल्पसंख्यक मतदाता - करीब 35 हजार, SC - करीब 45 हजार शेष अन्य जाति शामिल है।
