Thu, 08 06, 2026
देश

शेखावाटी की माटी में हाथी ने जमाए पैर, कई बने ‘माननीय’:

वर्ष 2008 व उसके बाद से हर विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी पहुंचे विधानसभा, कइयों का बिगाड़ा समीकरण

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शेखावाटी में भाजपा व कांग्रेस के बाद उम्मीदवार हाथी को भी अपना साथी बना रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी वर्ष 2008 व उसके बाद सीकर व चूरू से जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। कई बार तो बसपा के प्रत्याशियों ने सरकार बनाने व बचाने में भी अहम भूमिका निभाई है। अब फिर से कुछ प्रत्याशी बसपा का टिकट ले आए हैं तो अनेक टिकट का प्रयास कर रहे हैं। कई जगह बसपा के प्रत्याशी भाजपा व कांग्रेस का समीकरण भी बिगाड़ चुके। मुकाबले को त्रिकोणीय भी बना चुके।
वर्ष 2018
बसपा ने शेखावाटी में अनेक जगह से प्रत्याशी बनाए। कई जगह प्रत्याशियों ने भाजपा व कांग्रेस का समीकरण भी बिगाड़ा। झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी से राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने बसपा के टिकट पर 34 फीसदी से ज्यादा मत लेकर जीत दर्ज की। सरकार में राज्य मंत्री भी बने।
वर्ष 2013
वर्ष 2008 की तरह ही तेरह में भी शेखावाटी से बसपा के दो विधायक विधानसभा में पहुंचे थे। इस साल खेतड़ी से बसपा ने पूरण मल सैनी को प्रत्याशी बनाया और वे 42 हजार से ज्यादा मत लेकर विधानसभा में पहुंचे। उसी वर्ष चूरू जिले के सादुलपुर से बसपा प्रत्याशी मनोज कुमार न्यांगली 59 हजार से ज्यादा मत लेकर विधानसभा में पहुंचे।
वर्ष 2008
झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र से बसपा ने राजेन्द्र गुढ़ा को प्रत्याशी बनाया। वे 28 हजार से ज्यादा मत प्राप्त कर विधानसभा में पहुंचे। नवलगढ़ से राजकुमार शर्मा ने भी बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की। पचास हजार से ज्यादा मत प्राप्त किए। सरकार बनाने के लिए सीट कम पड़ने पर दोनों ही सरकार के साथ रहे और मंत्री भी बने। वहीं चूरू जिले के सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र से वीरेन्द्र न्यांगली ने बसपा से चुनाव लड़ा और वे दूसरे स्थान पर रहे।

 

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