Thu, 08 06, 2026
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प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर बूस्टर डोज:

चुनावी प्रचार का बदला तरीका: सोशल मीडिया का भी ले रहे सहारा

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प्रदेश में विधानसभा चुनाव की रंगत बढऩे लगी है। जहां-जहां टिकट फाइनल हो चुके हैं, वहां प्रचार-प्रसार भी परवान पर है। इस बार नेताओं ने ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया पर भी खूब फोकस कर रखा है। सोशल मीडिया पर हर दूसरी पोस्ट किसी ने किसी नेता के दौरे, सेवा कार्य और भाषण से जुड़े वीडियो-फोटो की दिख रही है। नेता भी चुनावी माहौल को रंग देने के लिए सोशल मीडिया पर खूब पैसा खर्च कर रहे हैं। जिसके लिए बाकायदा सोशल मीडिया मैनेजमेंट के लिए अलग से सेल का गठन भी कर रखा है। यानी कि नेताओं ने चुनावी गतिविधियां ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने सोशल मीडिया हैंडल पर बूस्टर लगवा दिया है।

सोशल मीडिया मैनेजमेंट टीम

सोशल मीडिया में वर्चस्व कायम करने के लिए बहुत से प्रत्याशियों ने अलग से सेल का गठन कर दिया है। सोशल मीडिया की जानकारी रखने वाले युवाओं को चुनावी पैकेज पर हायर कर रखा है। सोशल मीडिया अकाउंट संभालने वाली सेल को एड, कंटेंट, वीडियो, न्यूज तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी जाती है। वहीं सोशल मीडिया के सभी अकाउंट भी यही सेल संभालती है।

जितनी पहुंच, उतना खर्च

सोशल मीडिया एक्सपर्ट के अनुसार चुनाव के समय सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खर्च भी बढ़ गया है। जिसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खर्च अलग-अलग आता है। जैसे फेसबुक में एक वीडियो को दस हजार लोगों तक बुस्ट करवाने पर कम से कम 15 सौ से दो हजार रुपए, इंस्टाग्राम पर तीन से चार हजार रुपए के खर्च में दस हजार लोगों तक कंटेंट पहुंचाया जा रहा है। हालांकि फॉलोअर्स बढऩे की गारंटी नहीं दी जा रही।

राजस्थानी-हरियाणवी गानों का सहारा

जिसे टिकट मिल चुकी, उसमें से अधिकतर ने खुद पर हरियाणवी-राजस्थानी धूनों पर गाने भी रिकॉर्ड करवा रखे हैं। जो कि सोशल मीडिया के साथ माइक से भी प्रचारित किए जा रहे हैं। झुंझुनूं के एक प्रत्याशी ने बताया कि लोकप्रिय धूनों को इसलिए चुना जाता है कि यह जल्दी ही आमजन की जुबान पर चढ़ जाती है।

टिकट मिलते ही खर्च हुआ शुरू

अलग-अलग प्रत्याशियों के सोशल मीडिया अकाउंट को संभाल रही कंपनी के एक व्यक्ति ने बताया कि जब तक टिकट तय नही हुए थे, नेताजी पैसा खर्च करने में कतरा रहे थे। मगर टिकट तय होते ही प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया पर दिल खोलकर खर्च करना शुरू कर दिया। चुनावी माहौल को देखते हुए बहुत से कंपनियों ने जरूरत के अनुसार काम का टारगेट पूरा कर लिया है।

पिछले चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा

सोशल मीडिया एक्सपर्ट झुंझुनूं के अजय कुमार के अनुसार चुनावों को लेकर प्रत्येक प्रत्याशी सोशल मीडिया पर एक्टिव होना चाहता है। गत चुनाव के तुलना में इस बार सोशल मीडिया का क्रेज बढ़ा है। अधिकतर प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया सेल बना ली है। जिसके लिए प्रत्याशियों ने अलग से बजट भी निर्धारित कर रखा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर वाट्सअप पर गु्रप भी बना रखे हैं। जिसमें भी पोस्ट को शेयर किया जाता है।

हर वर्ग-उम्र को लुभाने की कोशिश

प्रत्याशी सोशल मीडिया हैंडल इसलिए बूस्ट करा रहे हैं। वजह, कुछ वर्षों से मतदाता फोन पर ज्यादा सक्रिय हैं। बूस्टर लगवाते वक्त सुविधा होती है कि नेता जरूरत के अनुसार फिल्टर लगवा सकते हैं। जैसे महिला या पुरुष मतदाता को टारगेट करना या आयुवर्ग विशेष को साधना है तो उसी अनुसार वीडियो या पेज पर फिल्टर लगवाए जाते हैं। यानी कि जितने फिल्टर होंगे, उतना खर्च बढ़ेगा।

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