लम्बी उम्र की दुआओं का असर जालोर जिले की महिलाओं पर नजर आता है। ऐसा लगता है जालोर की महिला शक्ति भगवान के घर से अधिक उम्र लिखवाकर आई है। यहां पुरूषों की तुलना में महिलाओं की उम्र अधिक है। पहले चुनाव से लेकर अब तक आए उतार चढ़ाव और विकास को लेकर इन बुजुर्ग मतदाताओं को अच्छा अनुभव रहा है। बुजुर्ग मतदाताओं की माने तो अब चुनाव में प्रलोभन, लालच और स्वार्थ जैसे विषय आ गए है। पुराने जमाने में इंसान और उसकी छवि को देखकर वोट दिया जाता था। विभिन्न पार्टियों के पदाधिकारियों के बीच भी स्वस्थ परिचर्चा होती थी। लेकिन अब चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते है।
सांचौर में सर्वाधिक, आहोर में सबसे कम
जिले के शतायु मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर डाले तो सांचौर में सर्वाधिक शतायु मतदाता है। दो शतक के पार यहां के शतायु मतदाता इस बार अपने मताधिकार से लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेंगे। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो सांचौर विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 205 मतदाता ऐसे है, जिनकी आयु सौ साल से अधिक है। इतना ही नहीं यहां पर चौदह मतदाता तो 110 साल से भी अधिक आयु के है। वहीं सबसे कम 93 शतायु मतदाता जालोर विधानसभा क्षेत्र में है।
उम्र ढल गई, लेकिन जज्बा फिर भी कायम
जालोर के लाल पोल के अंदर रहने वाली देवी पत्नी डायाराम 102 साल की उम्र में अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। देवी की उम्र भले ही अधिक हो गई है, लेकिन मतदान का जज्बा अभी भी कम नहीं हुआ है। पुराने समय में वोट डालने के लिए वो महिलाओं के समूह के साथ गीत गाते हुए वोट डालने जाती थी। उस समय मतदान किसी उत्सव से कम नहीं होता था। बकौल देवी ने बताया कि पहले चुनावों में इतनी तडक़ भडक़ नहीं होती थी। ना तो नेताओं की गाडिय़ों के काफीले होते थे और ना ही लाउड स्पीकर का इतना शोरगुल होता था। नेता पैदल ही चलकर गांव चौराहे के नुक्कड़ पर खड़े होकर लोगों से वोट की अपील करते थे। देवी ने बताया कि हर मतदाता को अपने मत का प्रयोग जरूर करना चाहिए। हर वोट कीमती है।
