Thu, 08 06, 2026
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बैलगाड़ी से होता था चुनाव प्रचार, अब हुआ हाईटेक:

बुजुर्गों ने पांच दशक पहले के चुनाव प्रचार के बताए किस्से

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आधुनिक दौर में चुनाव हाईटेक हो गया है।चुनाव प्रचार के तरीके बदल गए हैं। लग्जरी गाडिय़ों के साथ हेलीकॉप्टर से भी प्रचार होने लगा है। लेकिन पिछले पांच दशक पहले के चुनाव पर नजर डाले तो उस समय चुनाव प्रचार बैलगाड़ी से होता था। पत्रिका ने कुछ बुजुर्ग मतदाताओं से चुनाव प्रचार पर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पहले कार्यकर्ता बैलगाड़ी में बैठ प्रचार के लिए घर-घर जाते थे। उम्मीदवारों को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती थी। उम्मीदवार अपने गिने चुने समर्थकों के साथ जिस गांव में जाता था वहां एक स्थान पर बैठकर पंच पटेल समर्थन दे देते थे। खास बात ये थे कि पहले समर्थन में अधिक मनुहार नहीं होती थी।
उम्मीदवार की देखते थे सादगी
5 दशक पहले साधनों का अभाव था। पहले बैलगाड़ी व ऊंट गाड़ी से उम्मीदवारों द्वारा प्रचार किया जाता था। चुनाव में जातिगत बोल बाला नहीं था। केवल उम्मीदवार की सादगी व निष्ठा देखी जाती थी। गांव के सभी लोग एक जगह इकट्ठे होकर एक जने को समर्थन दे देते थे। हम लोग भी कई बार बैलगाड़ी में प्रचार करने गए थे।
रोटी-प्याज पोटली में ले जाते थे बांधकर
पहले प्रचार बैलगाड़ी में होता था। उम्मीदवार के समर्थक प्याज और रोटी पोटली में बांधकर साथ ले जाते थे। रास्ते में भूख लगने पर मिल बैठकर खा लेते थे। पहले विधानसभा क्षेत्रों का दायरा भी लंबा चौड़ा नहीं होता था।
एक दिन में पूरा गांव घूमना होता था मुश्किल
पहले और अब में चुनाव प्रचार में दिन-रात का अंतर हो गया है। पहले बैलगाड़ी से चुनाव प्रचार होता था। कई बार तो उम्मीदवार एक एक दिन में पूरे गांव में प्रचार नहीं कर पाता था। लेकिन अब गांव क्या पूरे विधानसभा क्षेत्र में एक दिन में भ्रमण कर आते हैं। चुनाव प्रचार में पहले बहुत ही कम खर्च आता था। पहले लोग ना रिश्वत लेते ना ही शराब पीते थे।
पहले चुनाव प्रचार में ज्यादा शोर शराबा नहीं होता था। घर-घर जाकर प्रचार करते थे। उम्मीदवार के समर्थक गांव में आकर पंच-पटेलों से बात करते थे। पंच पटेलों के कहने पर सभी लोग उसी उम्मीदवार को वोट देने के लिए अपना समर्थन दे देते थे। लेकिन अब जमाना हाइटेक हो गया है।

 

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