विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने के लिए नेताओं को वोटरों के आगे वोट के लिए हाथाजोड़ी करनी पड़ रही है, वहीं कृषि प्रधान इस जिले के किसानों को खरीफ की प्रमुख नकदी फसल नरमा (अमरीकन कपास-बीटी कॉटन) की चुगाई के लिए चुगारों के आगे हाथाजोड़ी करनी पड़ रही है। वोट के लिए हाथाजोड़ी करने वाले नेताओं को वोटरों से झूठे-सच्चे आश्वासन मिल रहे हैं, वहीं नरमा चुगाई के हाथाजोड़ी करने वाले किसानों को पहले पहल तो चुगारों से टाइम नहीं होने का जवाब मिल रहा है। बार-बार मिन्नत करने पर चुगारे नरमा चुगाई की दर के साथ जो शर्तें रख रहे हैं। उन्हें सुनकर किसानों की हालत नरमा चुगाई के रण में रणछोड़ जैसी हो रही है। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही टिकट के दावेदार नेताओं ने जनसंपर्क कर वोट मांगने शुरू कर दिए। जिन सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है, उन्होंने चुनाव कार्यालय खोलने और विधिवत जनसंपर्क की तैयारी शुरू कर दी है।
उम्मीदवारों के यहां समर्थकों का जमघट लगना शुरू हो गया है। नरमा की चुगाई का सीजन विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले शुरू हो गया लेकिन किसानों को चुगारे नहीं मिल रहे। पंजाब से आ रहे चुगारे प्रति किलो चुगाई ज्यादा मिलने और दोनों समय का खाना मिलने से बीकानेर जिले के उन इलाकों में चले गए जहां नरमा की बिजाई होती है। पंजाब के चुगारों की देखादेखी स्थानीय चुगारों ने भी चुगाई की दर बढ़ाने के साथ-साथ शर्तों की ऐसी सूची तैयार की है कि उसे पढ-सुन कर किसानों के पसीने छूट रहे हैं और वे चुगाई करवाने के बजाय खड़ी फसल पर हल चलाने की सोच रहे हैं। बीज, बिजाई पर होने वाले खर्च, खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में चुगाई का खर्च जोड़ कर जिन किसानों ने नरमा की फसल से होने वाली कमाई का गणित लगा लिया है उन्होंने खड़ी फसल में हल चला कर जमीन को गेहूं या सरसों की बिजाई के लिए तैयार कर लिया है।
किसान विकल्प पर करने लगे विचार
नरमा की फसल को गुलाबी सुंडी से इस बार जो नुकसान हुआ है, उसे देखकर किसान इस फसल के विकल्प पर विचार करने लगे हैं। किसानों के संगठन किसान संघर्ष समिति संयोजक अमरसिंह बिश्नोई के अनुसार इस बार किसानों को बीटी कॉटन के बीज ने धोखा दिया है। गुलाबी सुंडी के प्रकोप का पता चलने पर किसानों ने महंगे से महंगे कीटनाशकों का छिड़काव किया। लेकिन फसल नहीं बची। अब बची खुची फसल को सहेजने के लिए चुगारे नहीं मिल रहे तो किसान नरमा का विकल्प तलाशने लगे हैं।
चुगाई की दर और शर्तें
इस बार अव्वल तो किसानों को चुगारे ही नहीं मिल रहे। अगर मिल रहे हैं तो वह प्रति किलो चुगाई 11 रुपए से लेकर 13 रुपए तक ले रहे हैं। इसके अलावा चार बार चाय, पशुओं के लिए हरा चारा, छोटे बच्चों के लिए दूध और सुबह किसी भी साधन पर घर से खेत तक लाने और शाम को घर तक छोड़ने की शर्त भी रख रहे हैं। पंजाब के जो चुगारे बीकानेर जिले में नरमा की चुगाई के लिए गए हैं, उन्हें प्रति किलो चुगाई 15 रुपए देने के साथ-साथ सुबह-शाम का खाना और दो बार चाय देना तय हुआ है। स्थानीय चुगारों ने इसी को आधार बना कर चुगाई की दर और शर्तें तय की है। नरसिंहपुरा के किसान देवीलाल सहारण का कहना है कि बहुत से किसानों ने तो चुगारों को आधी फसल लेकर चुगाई करने का ऑफर दिया, तब भी वे तैयार नहीं हुए।
