आम चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से 10 साल पहले चुनाव आयोग की ओर से लाई गई मतदाता पर्ची (वोटर स्लिप) इस बार मतदाताओं को वितरित तो की जाएगी, लेकिन उससे मतदाता वोट नहीं दे पाएंगे। वोट देने के लिए मतदाताओं को साथ में कोई पहचान दस्तावेज दिखाना होगा, जिस पर उसका फोटो लगा हो।
आम चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में नवाचार करते हुए सभी मतदाताओं को फोटो युक्त वोटर स्लिप वितरित करवाई थी, जिसका असर यह रहा कि नागौर जिले में मतदान प्रतिशत में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि आई। यही स्थिति प्रदेश की थी, प्रदेश में भी 80 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने वोटर स्लिप का उपयोग करते हुए मतदान किया। वोटर स्लिप से मतदान में अचानक आई वृद्धि को देखते वर्ष 2018 के विधानसभा में भी इसे अपनाया और मतदान प्रतिशत 70 प्रतिशत के आसपास रहा, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने निर्णय बदल दिया। इस बार जारी किए गए निर्देशों के अनुसार मतदाताओं को बीएलओ के माध्यम से वोटर स्लिप वितरित तो की जाएगी, लेकिन उसमें न तो मतदाता का फोटो लगा होगा और न ही मतदाता पर्ची से वोट दे पाएंगे। यानी वोटर स्लिप के साथ मतदाताओं को पहचान का दूसरा दस्तावेज दिखाना होगा, जिस पर उसकी फोटो लगी हो। इस बार मतदाता पर्ची का नाम भी मतदाता सूचना पर्ची किया गया।
न दस्तावेजों का कर सकेंगे उपयोग
आयोग की ओर से मतदाता चुनाव में मताधिकार का उपयोग करने के लिए मतदाता फोटो पहचान कार्ड के अलावा 11 अन्य दस्तावेज का उपयोग होगा। जिसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, केन्द्र एवं राज्य सरकार एवं पीएसयू, पब्लिक लिमिटेड कंपनी की ओर से जारी सर्विस पहचान कार्ड, बैंक या डाकघर की फोटो युक्त पासबुक, पेन कार्ड, श्रम विभाग से जारी स्मॉर्ट कार्ड, नरेगा जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मॉर्ट कार्ड, फोटो युक्त पेेंशन दस्तावेज एवं सांसद, विधायक, विधानसभा परिषद सदस्य को जारी फोटो पहचान कार्ड भी शामिल।
सबसे ज्यादा मतदाता पर्ची वाले
पहली बार 2013 के विधानसभा में प्रदेश में कुल मतदाताओं में से 80.41 प्रतिशत ने वोटर स्लिप के माध्यम से मतदान किया था। नागौर जिले में 76.31 प्रतिशत मतदाताओं ने वोटर स्लिप से वोट दिया। वहीं खास तौर से मतदान के लिए बनाए गए मतदाता पहचान पत्र के माध्यम से प्रदेश में 19.35 प्रतिशत तथा जिले में 22.32 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था।
अब क्या होगा फोटो वोटर स्लिप का काम
आगामी विधानसभा चुनाव में भी मतदाता को बीएलओ के माध्यम से पहले की तरह वोटर स्लिप जारी होगी, लेकिन अब न तो स्लिप पर मतदाता का फोटो और न ही उससे वोट दिया जा सकेगा। अब स्लिप केवल मतदान के लिए बुलावा समान होगी। इससे मतदान केन्द्र पर मतदाता सूची में नाम तलाशने में सुविधा होगी। मतदान के लिए मतदाता को भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मान्य कोई दस्तावेज पेश करना होगा।
यह हो सकता है कारण
पिछले दो विधानसभा चुनावों में मतदान के समय पहचान दस्तावेज के रूप में मतदाता परिचय पत्र की जगह फोटो वोटर स्लिप के बढ़ते उपयोग ने भारत निर्वाचन आयोग की चिंता बढ़ा दी। माना जा रहा है कि इसी के चलते आयोग ने अब इस स्लिप के दुरुपयोग की आशंका एवं उसके सुरक्षा फीचर्स कमजोर होने के कारण नियमों में बदलाव कर इसको मतदाता पहचान दस्तावेज नहीं माने जाने का आदेश जारी किया है।
