Thu, 08 06, 2026
देश

सिविल लाइंस सीट: भाजपा या कांग्रेस.. कौन मारेगा बाजी, क्या कहते हैं आंकड़े:

गोपाल शर्मा को प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो से भी उम्मीद

post-img

सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र राजस्थान राज्य के 200 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है. यह जयपुर जिले में स्थित है और जयपुर संसद सीट के 8 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है । सिविल लाइंस विधानसभा में एससी मतदाताओं की संख्या लगभग 25,111 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 10.46% है। इस विधानसभा में एसटी मतदाताओं की संख्या लगभग 9,123 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 3.8% है।
25 साल के आंकड़ों ने बढ़ाई खाचरियावास की टेंशन!
सिविल लाइंस सीट का रिवाज है कि यहां से जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतकर आता है निश्चित तौर पर सरकार उसी पार्टी की बनती है. जिस तरह राजस्थान की राजनीति का मिथक एक बार बीजेपी तो दूसरी बार कांग्रेस का रहा है. उसी तरह इस सीट पर भी वोटर पहले ही अनुमान लगा लेते हैं कि सरकार किसकी बनने वाली है. अगर पिछले 15 साल के आंकड़ों की बात करें तो 2008 में कांग्रेस के प्रताप सिंह
खाचरियावास, 2013 में बीजेपी के अरुण चतुर्वेदी, 2018 में फिर से कांग्रेस के प्रताप सिंह खाचरियावास ने जीत दर्ज की. अगर इस बार के विधानसभा चुनाव की बात करें तो अधिकतर ओपिनियन पोल राजस्थान में बीजेपी की वापसी की बात कह रहे हैं. इस तरह से सिविल लाइंस सीट का इतिहास कांग्रेस प्रत्याशी खाचरियावास की टेंशन बढ़ा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के गोपाल शर्मा को अपनी राह आसान नजर आ रही है.
इस बार जनता का मूड
सिविल लाइंस में मुख्यमंत्री से लेकर हर एक वो मंत्री निवास करता है जो प्रदेश की राजनीति में बड़ा रसूख रखता है. इसलिए इस विधानसभा पर सबकी निगाहें टिकी रहती हैं. गोपाल शर्मा को टिकट मिलने से बीजेपी कि इस सीट पर जीतने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि गोपाल शर्मा राजनीति में एक नए चेहरे हैं जिन्हें अनुभवी प्रताप सिंह खाचरियावस का सामना करना पड़ेगा. लेकिन एक अनुभवी पत्रकार होने का फायदा गोपाल शर्मा को जरूर मिलेगा. अगर गोपाल शर्मा बीजेपी समर्थकों को एकजुट कर पाते हैं और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने का वादा करते हैं तो उनके पास खाचरियावास को हराने का मौका है. हालांकि अब इस सीट पर यह देखना काफी रोमांचक होगा कि दोनों में से कौन उम्मीदवार जीत अपने नाम करता है.
ब्राह्मण वोटर्स का है दबदबा
सिविल लाइंस विधानसभा सीट पर करीब 2 लाख 35 हजार वोटर्स हैं. इनमें ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 55 हजार हैं जो जीत-हार में अपनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि बीजेपी हर बार यहां से किसी ब्राह्मण प्रत्याशी को ही अपना उम्मीदवार बनाती है. संख्या के लिहाज से इसके बाद मुस्लिम और अनूसूचित जाति के मतदाताओं का नंबर आता है. 25 हजार अनुसूचित जनजाति और 25 हजार मुस्लिम वोटरों की संख्या है. इसके अलावा 25 हजार वैश्य, 10 हजार राजपूत और 20 हजार माली मतदाता हैं. इस सीट पर 10 फीसदी मतदाता तो ऐसे हैं जो बाहरी राज्यों से आकर यहां रह रहे हैं. ऐसे में चुनाव में ऐसे मतदाताओं की संख्या भी हार-जीत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है.


 

Related Post