Fri, 08 07, 2026
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मोबाइल पर आलाकमान! वोट किसे देने के सवाल से तय की जा रही रणनीति:

विधानसभा चुनाव 2023: अब मोबाइल के जरिए भी मतदाताओं को रिझाने की हो रही कोशिश

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विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव की तारीख भी तय हो चुकी है। टिकट पाने वाले अपना पूरा दम लगा चुके हैं। हालांकि जिले में प्रमुख दलों ने अपने-अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। इधर प्रदेश स्तर पर तमाम तरह के सर्वे कराकर यह जानने में जुटी है कि 2023 में किसके सर पर ताज आने वाला है। सर्वे के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। अब मोबाइल फोन के जरिए सर्वे कराने में पार्टियां पैसा पानी की तरह बहा रहीं हैं। जिले में लोगों के मोबाइलों पर चुनाव से जुड़े सर्वे भी हो रहा है। आप किस पार्टी को वोट करेंगे? पिछली बार किस पार्टी को वोट दी थी? इस तरह का सर्वे कर राजनीतिक दल अपनी थाह मालूम करने में जुटे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि लोगों का फोन नंबर संबंधित मोबाइल कंपनियों से लिए गए हैं और उन्हीं नंबरों पर फोन कराकर सर्वे कराया जा रहा हैं। शहर के कई लोगों के पास इस तरह के कॉल आ रहे हैं। अधिकांश का कहना था कि वह फोन तो रिसीव करते हैं, लेकिन उस सर्वे का हिस्सा नहीं बनते। बीच में ही फोन काट देते हैं। कई का कहना था कि इस सर्वे में वह हकीकत नहीं बताते हैं और कॉल को इग्नोर कर देते हैं। हालांकि जो प्रमुख दलों के समर्थक हैं। वह जरूर अपनी राय दे रहे हैं। इस विधानसभा चुनाव को लेकर लोगों में उत्साह तो दिख रहा है, लेकिन जनता स्पष्ट शब्दों में कुछ भी नहीं बोल रही है। सीटों की बात करें तो प्रत्याशियों की घोषणा न होने से लगातार चर्चा बनी हुई है।
गद्दी के लिए मन्नत
दोनों मुख्य राजनीतिक पार्टियों के नेता मां की उपासना में लग गए हैं। मन्नत मांगने के लिए जगह-जगह अर्जी लगाने की तैयारी है। राजनीतिक रसूख रखने वाले युवा प्रत्याशियों के साथ वाले कहते नजर आ रहे हैं कि इस बार भैया उसी जगह पर अर्जी लगाएंगे, जहां पिछले बार लगाई थी। उनकी तो वह फिक्स जगह है। उनकी मातारानी सुनती हैं। कभी भी उन्हें मायूस नहीं किया है। उधर, सामने दमखम वाली पार्टी के भावी प्रत्याशी भी गुप्त रूप से मंत्रोच्चर कर रहे हैं। गुप्त साधना में लीन हैं।
उनका दावा है कि कर्मकांड का यह वह साधन है, जहां दुश्मन को काबू करने में सहायक होता है। फिलहाल दोनों मुख्य पार्टी नवरात्र पर अपने-अपने ईष्ट की आराधना में लीन होकर गद्दी हासिल करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। देखते हैं देवी को कौन प्रसन्न कर पाते हैं।
नेताजी को रील का चस्का, साथ चलती है टीम
विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया का जोर है। जिन्हें टिकट मिल गया, वे पूरी ताकत से मैदान में आ गए हैं। जिन्हें नहीं मिला वे दावेदारी में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। नेताजी को रील का चस्का लग चुका है। वे जहां भी जाते हैं, उनकी टीम रील बनाकर अलग-अलग अकाउंट से इसे पोस्ट कर रही है। टिकट हासिल कर चुके नेताओं की इसके लिए पूरी टीम तैनात है। गंभीर मुद्दों पर बयान देकर वे खुद ही रील जारी करा देते हैं। स्थानीय स्तर पर ही नहीं, देश व प्रदेश स्तर के मुद्दों पर तुरंत ट्वीट कर रहे हैं। किसी की टीम में पांच-छह लोग हैं तो किसी ने एक को ही सारी जिम्मेदारी दे रखी है। मिलते-जुलते नाम के अलग-अलग अकाउंट से सभी पोस्ट वायरल की जा रही है। ऐसा ही कुछ कांग्रेस के दावेदार भी कर रहे हैं। वे धार्मिक या अन्य आयोजनों में जाते हैं तो साथ चल रही टीम रील बनाकर जारी कर रही है। अधिकांश दावेदारों ने सोशल मीडिया हैंडल करने के लिए टीम बना ली है। रील जारी करने के साथ गंभीर मुद्दे पर नेताजी की सहमति से ट्वीट करना भी इनकी जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया अकाउंट से स्पांसर कर पोस्ट वायरल करने का काम किया जा रहा है।

 

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