सर, मुझे मेरी 84 वर्षीय सासू मां की देखभाल करनी है,इसलिए मैं चुनाव ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी, प्लीज मैरी ड्यूटी निरस्त करवा दीजिए। द्मसाद्यब मैं कैंसर पीड़ित हूं और चुनाव में ड्यूटी करने में असमर्थ रहूंगा। किसी ने परिवार में तो किसी ने स्वयं की शादी का हवाला दिया है। वहीं एक कार्मिक नेे डेंगू बीमारी की बात कर ड्यूटी निरस्त करने का आवेदन किया है। कुछ इस तरह की गुहार अधिकारी-कर्मचारी निर्वाचन कार्य से बचने के लिए लगाने लगे हैं। दरअसल चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारी अधिकारियों के सामने अजब-गजब कारण लिखकर आवेदन कर रहे हैं और सिफारिश करा रहे हैं। प्रशासन के पास दर्जनों कर्मचारी प्रतिदिन नाम कटवाने के लिए पहुंच रहे हैं। मतदान दल में 5196 में कार्मिक नियुक्त है।
जानकारी के अनुसार प्रशासन के पास करीब 240 कर्मचारियों ने अब तक चुनाव ड्यूटी निरस्त करवाने के लिए आवदेन किया है। इन आवेदनों में अब तक 10 लोगों ने गंभीर बीमारी तो 60 ने स्वयं की बीमारी व 15 के आसपास लोगों ने शादी का हवाला दिया है। जबकि 130 के आसपास कर्मचारियों ने अजब-गजब बहानेबाजी की है। किसी ने परिवार की देखभाल,घर में शादी एवं माता-पिता की देखभाल आदि का हवाला दिया है। वहीं दो गर्भवति महिलाओं ने भी आवेदन दिया है। अधिकारी के अनुसार गंभीर बीमारी व बीमारी वालों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी, उसके बाद मेडिकल बोर्ड के पास फिजिकल जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक कर्मचारी ने दिल की बीमारी स्वास्थ्य खराब रहता है,इसलिए ड्यूटी निरस्त की जाए। एक ने कैंसर पीड़ित, छोटे बच्चों की देखभाल,पति-पत्नी ने चुनाव ड्यूटी में है,बच्चा छोटा है,पत्नी ने डयूटी निरस्त का आवेदन किया है। इसके अलावा डेंगू होने के कारण अस्पताल में भर्ती हूं तो एक कार्मिक ने पाइल्स का ऑपरेशन होने व दो पुरुष व एक महिला कार्मिक ने स्वयं की शादी का हवाला दिया है। जबकि दो पुजारी ने भी आवेदन कर ड्यूटी निरस्त कराने का प्रार्थना पत्र दिया है। यही नहीं 8 दिव्यांग ने भी आवेदन किया है।
सिफारिशों से अफसर परेशान
चुनाव ड्यूटी न करने के लिए कर्मचारी पूरी जोर आजमाइश कर रहे है। अधिकारियों के पास फोन करवा रहे है। खुद तो आवेदन-निवेदन कर रहे हैं और जब बात नहीं बनती दिख रही तो सिफारिश का हथकंडा अपना रहे हैं। दिनभर फोन आने से भी अधिकारी परेशान है।
