Thu, 08 06, 2026
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विधानसभा पहुंचने के लिए सांसदों का अपनों से ही कड़ा संघर्ष, इस बार होगी असली परीक्षा:

भाजपा सांसद और कांग्रेस विधायक में कांटे की टक्कर

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राजस्थान विधानसभा की चुनावी बाजी पलटने के लिए भाजपा ने सात सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा है, लेकिन कई सीटों पर दांव उलटा पड़ता दिख रहा है। पार्टी से बगावत करके चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे प्रत्याशियों से ही सांसदों को कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि कुछ सीटों पर डैमेज कंट्रोल की भी कोशिश हो रही है, लेकिन उनके लिए राह आसान नहीं है। हार मिली तो चार महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए भी लाले पड़ जाएंगे। चुनाव जीतने की स्थिति में सांसद लोग विधायक बनने के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर मंत्री के लिए प्रबल दावेदार हो जाएंगे। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में अभी तक केवल विद्याधर नगर से दीया कुमार की सीट सबसे सुरक्षित दिख रही है, जबकि सांचौर, किशनगढ़, तिजारा और खींवसर में सांसदों को बड़ी चुनौती मिल रही है। इन फंसी हुईं सीटों को सांसद कैसे निकालकर लाते है या फिर शिकस्त खाते हैं। तीन दिसंबर को यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
विद्याधरनगर में फैल सकती है दीया की रोशनी
भाजपा के लिए विद्याधरनगर सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है। इस सीट पर राजपूत समाज का ज्यादा प्रभाव है। इससे पहले भैरोसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी दो बार के विधायक रहे, लेकिन भाजपा ने इस बार टिकट बदलकर जयपुर राजघराने की और राजसमंद की सांसद दीया कुमारी को प्रत्याशी बनाया है। राजवी को चित्तौडगढ़ से टिकट दिया गया है। दीया कुमारी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी सीताराम अग्रवाल मैदान में है। सीताराम अग्रवाल पिछली बार भी इस सीट से बड़े अंतर से चुनाव हार गए थे जबकि बीजेपी इस सीट को लगातार बड़े अंतर से चुनाव जीत रही है। इस सीट पर अभी भी एकतरफा माहौल है। यह बीजेपी की सबसे मजबूत सीट मानी जाती है।

शेखावत के शांत पड़ने से राठौड़ की राह आसान
जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को टिकट मिलने के बाद से ही उनका विरोध हो रहा था। 2018 में यहां से भाजपा प्रत्याशी रहे राजपाल सिंह शेखावत और उनके समर्थकों की ओर से जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। टिकट न मिलने पर शेखावत ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी कर दिया था, लेकिन नौ नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के फोन आने के बाद शेखावत शांत पड़ गए। उन्होंने कहा कि शाह ने मुझे भरोसा दिया है। इस सीट से मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारिया ने पहले ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया था, जिसके कारण कांग्रेस ने एनएसयूआई के प्रदेश अभिषेक चौधरी को मैदान में उतारा है। अब इस सीट पर राठौड़ की राह आसान मानी जा रही है।

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