Thu, 08 06, 2026
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राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: हाईकोर्ट सख्त, 5 दिन में चुनाव तिथि बताने के निर्देश:

चुनाव आयोग से पूछा- चुनाव की घोषणा क्यों नहीं की? ओबीसी आयोग से भी रिपोर्ट में देरी पर जताई नाराजगी

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जयपुर राजस्थान में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव को लेकर गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि वह पांच दिन के भीतर (सोमवार तक) चुनाव की तारीख बताए।

अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देशित किया कि सोमवार तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा और वार्डों की लॉटरी निकालने की तिथि से अवगत कराया जाए। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव भी अदालत में उपस्थित रहे। यह सुनवाई पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर हुई।

चुनाव आयोग से कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त से कहा कि "आप क्यों चाहते हैं कि आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए?"

इस पर चुनाव आयुक्त ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की सभी तैयारियां पूरी हैं, लेकिन सरकार की ओर से आरक्षण का वर्गीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि लॉटरी निकालकर आरक्षण सूची उपलब्ध करा दे तो आयोग दो दिन के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

ओबीसी आयोग से भी जवाब-तलब

हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग से भी रिपोर्ट में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब 9 मई 2025 को सरकार ने आयोग का गठन तीन महीने के लिए किया था, तो अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने कहा कि यदि आयोग से काम नहीं हो रहा है तो स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए।

अदालत ने यह भी पूछा कि जब पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि चुनाव आयोग ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करेगा, तो चुनाव की घोषणा अब तक क्यों नहीं की गई।

31 जुलाई तक चुनाव कराने का आदेश

हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि उसने 22 मई को राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ओबीसी आयोग ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में देरी की बात कही, जिस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालती आदेशों की हर हाल में पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए।

 

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