बूंदी जिले में शतायु पार बुजुर्ग मतदाताओं में लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी निभाने को लेकर उत्साह बना हुआ है। इस वर्ष 100 वर्ष से अधिक उम्र के 177 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
चुनाव आयोग की ओर से दिव्यांग मतदाताओं और 80 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं के लिए वोट एट होम यानि घर पर मतदान करने की व्यवस्था की गई है। शहर के नैनवां रोड रजतग्रह कॉलोनी निवासी 104 वर्षीय भंवरलाल शर्मा बताते है कि वो आज भी मतदान करने को लेकर उत्सुक है। मतदान करना हमारा अधिकार है। इसके लिए दूसरे को भी प्रेरित करना चाहिए। समय-समय के अनुसार चुनाव की प्रक्रिया में भी काफी परिवर्तन हुआ है। पहले के मुकाबले निर्वाचन विभाग कई सुविधा दे रहा है। पुराने समय में साधारण स्लीप दी जाती थी और वेलेट पर मोहर लगाकार पेटियों में मतदान किया जाता था। वो बताते है कि राजा महाराया चुनाव में भाग लेते थे। अपने स्तर पर लोगों का स्पोर्ट करते थे। भंवरलाल आजादी के बाद से अब तक न केवल खुद लगातार मतदान करते आ रहे है,बल्कि लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करते है। वे पटवारी रहे। उनका जन्म 1920 में हुआ था। लोकसभा, विधानसभा सहित निकायों के हर चुनाव में मतदान किया।
1952 में हुए थे लोकसभा चुनाव
104 वर्षीय भंवरलाल के पुत्र नंदप्रकाश शर्मा बताते है कि देश में सबसे पहले लोकसभा चुनाव 1952 में हुए थे। उस समय में भी उन्होंने मतदान किया था। यह सिलसिला निरंतर जारी है। वर्ष 1975 में पटवारी पद से सेवानिवृत हुए है। वे कहते है इस बार तो घर से भी मतदान की सुविधा है।
युवा देश का भविष्य
भंवरलाल बताते है कि युवा देश का भविष्य है। लोकतंत्र में इनके मतदान की भी काफी अहमियत है। वे ज्यादा से ज्यादा मतदान करें,ताकि अच्छा प्रतिशत बने। प्रजातंत्र की मजबूति के लिए मतदान आवश्यक है। सभी शत प्रतिशत मतदान करें।
