सर्वपितृ कार्य अमावस्या शनिवार को है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक श्राद्ध पक्ष में दान-पुण्य के साथ ही पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान का यह अंतिम मौका होता है। इस दिन कंकण सूर्यग्रहण भी रहेगा, लेकिन भारत में ग्रहण नहीं दिखने के कारण सूतक काल नहीं रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं.सुधाकर पुरोहित ने बताया कि पूर्वजों के निधन की तिथि ज्ञात नहीं हैं अथवा किसी कारणवश पितृपक्ष में नियत तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए, तो इस अमावस्या पर पितृकर्म किया जा सकता है। इस वर्ष सर्व पितृकार्य अमावस्या विशेष है, क्योंकि यह शनिवार को आ रही है। चार साल बाद यह शनैश्चरी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। जो की पितृकर्म में विशेष फलदायी रहेगी। जरूरतमंद को अवश्य ही कुछ न कुछ अपनी क्षमता अनुसार दान करें। क्योंकि इस दिन दान-पुण्य करना सामान्य अमावस्या के अपेक्षा दस गुना अधिक फलदायी होता है।
होंगे सामूहिक श्राद्ध तर्पण
अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से सर्व पितृ अमावस्या पर गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी, गायत्री शक्तिपीठ वाटिका, राधा कृष्ण शिव मंदिर, विकास नगर-ए दिल्ली-अजमेर एक्सप्रेस हाईवे के पास मुरलीपुरा में सुबह सात बजे से सामूहिक श्राद्ध, तर्पण और हवन का कार्यक्रम होगा।
