Thu, 08 06, 2026
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कला संस्कृति और अध्यात्मिक चेतना की संवाहक रहे रामलीला मंचन को है संरक्षण की दरकार:

चूरू की पुरानी संस्थाएं लुप्त, नहीं मिल रहे कलाकार : हनुमान कला मंदिर व शिव कला मंच करता है लीला मंचन परंपरा का निर्वहन

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 वर्तमान के ढ़ाई दशक पूर्व तक का एक वह समय था जब चूरू रामलीला मंचन, नाट्य और लोककला की दृष्टि से कला व संस्कृति तथा आध्यात्मिक चेतना का संवाहक रहा था। लेकिन समय के साथ आए बदलाव में इस मंचीय कला को घुण लग गया। इसलिए ही आज इसे संरक्षण की दरकार महसूस हो रही है। करीब ढ़ाई दशक पूर्व तक चूरू में अनेक संस्थाएं थी, जिन्होंने समय के बदलाव के साथ नवाचार करते हुए रामलीला मंचन की पंरपरा को जीवंत बनाए रखा। पता नहीं बाद में ऐसा क्या हुआ कि ज्यों-ज्यों पुराने कलाकर उम्र के पड़ाव पर पहुंचे रामलीला मंचन सिमटने लगा। सिमटते-सिमटते उस दौर में पहुंच गया कि आज रामलीला मंचन देखने के लिए यहां के लोग तरस रहे हैं। हालांकि आज भी चूरू की पुरानी संस्थाओं में रेलवे की हनुमान कला मंदिर व नया बास की शिव कला मंच है जो रामलीला मंचन की परंपराओं का निर्वहन करते हुए शारदीय नवरात्र में उसी मंच पर मंचन कर रहे है, जहां से यह शुरू हुई थी। जबकि भोलेनाथ कला मंच भी रामलीला मंचन की पताका फहराए हुए हैं और कलाकार रामलीला मंचन की संस्कृति को जीवंतता प्रदान कर रहे हैं।
शहर में यहां होती थी रामलीला
छोटी काशी चूरू की सबसे पुरानी रामलीला कमेटी की ओर से प्राचीन गढ़ के ऐतिहासिक मैदान में रामलीला हुआ करती थीं, जो चूरू की सबसे पुरानी रामलीला में से एक थी। इस कला कमेटी में कलाकार हरिप्रसाद ओझा, चण्डीप्रसाद शर्मा, मोहनलाल माटका, बैजनाथ सोनी, अर्जुनलाल सोनी, श्यामसुन्दर दलाल, ठाकुरप्रसाद बंशिया, राजेन्द्र शर्मा मास्टर आदि हुए करते थे, लेकिन अब ये नहीं रहे। कमेटी के आयोजन मण्डल में शहर के नामचीन समाजसेवी हुआ करते थे लेकिन उनमें अधिकांश अब नहीं है। शहर के पंचमुखी बालाजी मंदिर के पीछे आमोद-प्रमोद कला कमेटी की ओर से उस्ताद डेडराज के सान्निध्य मे रामलीला हुआ करती थी। जिनमें विनोद पितर, हनुमान आदित्य, राधेश्याम चोटिया, श्रवण मास्टर, महेश शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा व रामस्वरूप शर्मा आदि कलाकार हुआ करते थे। बैदों की धर्मशाला के पास चूरू कला मंच की ओर से रामलीला का आयोजन हुआ करता था। भार्गव बस्ती के महावीर चौक में रामलीला मंचन हुआ करता था। सुभाष चौक में सुभाष कला मण्डल, गायत्री मंदिर के निकट गायत्री कला मंच, खेमका सति मंदिर के पास ओम कला मंच, बजरंग बली चौक में मिलजुल कला कमेटी, गढ़ के पीछे बाल कला कमेटी, प्रतिभा नगर में प्रतिभा कला मंच, वाटिका कला मंच, नया बास में श्रीराम कला मंच, पुनरासर बालाजी मंदिर के पास शिव शक्ति कला मंच तथा संतोषी माता मंदिर के पास क्षीर सागर कला मंच की ओर से रामलीला का मंचन हुआ करता था। जो अब बंद हो गया है।
अब केवल चार स्थानों पर हो रही है रामलीला
एक समय था जब शहर में करीब बीस संस्थाओं के कलाकार अलग-अलग मंचों पर रामलीला के पात्रों की भूमिका निभाया करते थे, लेकिन वर्तमान में केवल चार संस्थाओ की ओर से रामलीला मंचन किया जा रहा है। जिनमें रेलवे कॉलोनी में हनुमान कला मंदिर, नया बास में शिव कला मण्डल, जिला मनोरंजन क्लब में भोलेनाथ कला मंच और बद्रीनाथ मंदिर के पास बाल कला मंच की ओर से रामलीला मंचित की जा रही है।
टीवी सीरियल और आधुनिकता ने मंचन को किया चोपट
रामलीला मंचन कभी चूरू की पहचान हुआ करती थी लेकिन बीते वर्षों में हावी हुए टीवी सीरियलों के कारण रामलीला देखने आनेवालों की संख्या घटती रही। हालांकि जितने साधन थे उसी अनुरूप आधुनिकता युक्त नवाचार भी किए लेकिन रोजगार आवश्यक था तो युवा कलाकार तैयार करना कठिन हो गया। दूसरी ओर दर्शको का रामलीला की ओर रूझान भी कम हो गया और जिसके चलते धीरे-धीरे रामलीला मंचन सिमट कर रह गया। फिर भी यदि प्रयास किया जाए तो रामलीला मंचन को जीवंत किया जा सकता है। आवश्यकता है सकारात्मक प्रयास की। 

 

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