Thu, 08 06, 2026
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सर्व पितृ अमावस्या पर करें भूले-बिसरे पूर्वजाें का श्राद्ध:

उदया तिथि के अनुसार 14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाएगी

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इस बार पितृ विसर्जनी अमावस्या 14 अक्टूबर शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन पितृ पक्ष का समापन होगा। अगर किसी को अपने पितर की पुण्य तिथि याद नहीं है तो वह सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म कर सकता है।
इस बार सर्वपितृ शनिश्चरी अमावस्या पर गज छाया नाम का योग बन रहा है। ऐसा तब होता है जब चंद्रमा सूर्य के साथ कन्या राशि हस्त नक्षत्र पर गोचर करता हो तो गज छाया नाम का योग बनता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस प्रकार के संयोग को विशिष्ट रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों को दिया श्राद्ध पितरों को तृप्त करता है। यही कारण है कि इस दिन पितरों को श्राद्ध अर्पण करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र जोशी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सर्व पितृ श्राद्ध तिथि कहा जाता है। इस दिन भूले-बिसरे पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या इस बार 14 अक्टूबर को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 13 अक्टूबर रात्रि 09.50 मिनट से शुरू होगी और 14 अक्टूबर मध्य रात्रि 11:24 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार 14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन श्राद्ध-तर्पण के लिए तीन मुहूर्त बताए गए हैं, जो सुबह 11:44 बजे से दोपहर 3:35 बजे तक रहेंगे। इस अवधि में किसी भी समय पूर्वजों के लिए पूजा, तर्पण, दान आदि किया जा सकता है। इस साल इसी दिन सूर्य ग्रहण रात्रि के समय लग रहा है और श्राद्ध कर्म दोपहर के समय किया जाता है, इसलिए इन कर्मों पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पीपल का पूजन महत्वपूर्ण
शनि के अनुकूलता व पितरों के अनुकूलता के लिए पीपल के वृक्ष को विशेष रूप से मान्यता दी। श्रीमद् भागवत गीता में भी पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध अर्पण करने से पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है। वहीं शनि की साढ़ेसाती या ढैया या महादशा का प्रभाव विपरीत क्रम से चल रहा हो तो भी शनि को अनुकूल बनाने के लिए पीपल का पूजन यथा विधि करना चाहिए।

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