नवरात्र समाप्त होते ही घर की साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य जोरों से चल रहा है। घरों व प्रतिष्ठानों में सफाई हो गई है। लोगों ने घरों-दुकानों को अच्छे व आकर्षक रंग से सजाना-संवारना शुरू कर दिया है।
पेंट विक्रेता मोहम्मद अय्या ने बताया कि अधिकतर लोगों का आकर्षक दिखने वाले रंगों पर ज्यादा फोकस है। डिस्टेंपर और ऑयल ब्रांड पेंट के चाहने वालों की संख्या कम हुई है। प्लास्टिक पेंट की और अधिक रूझान देखा जा रहा है। इन पेंट्स की खासियत और खूबसूरती लोगों को लुभा रही है। जो इसका खर्च नहीं उठा पाते वो चाहते हैं कि कम से कम घर के गेस्ट रूम में इसकी पेंटिंग जरूर हो जाए। इसकी खासियत है कि दीवार पर किसी भी तरह का दाग लग जाए, उसे पानी से धोकर या कपड़ से साफ किया जा सकता है।
कलर की कीमत
बाजार में इस बार कंपनी का ब्रांडेंट पेंट 250 रुपए प्रति लीटर से 800 रुपए में मिल रहे हैं। डिस्टेंपर 20 लीटर की बाल्टी 1000 से 1500 रुपए में मिल रही है। इसके अलावा प्लास्टिक पेंट 20 लीटर 4000 से 7000 रुपए तक में उपलब्ध है। दूसरी ओर चूना व गेरू का रेट 15-20 रुपए किलो है। सफेद सीमेंट 40 रुपए किलो है।
रंगों के चयन में इंटरनेट का इस्तेमाल
आधुनिक युग में इन दिनों रंगों के चयन के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है।
पहले रंगाई-पुताई के लिए गिने-चुने ही कलर हुआ करते थे, लेकिन अब रंगों की भरमार है। सामने इतने सारे कलर देखकर ग्राहकों के सामने दुविधा न खड़ी हो जाए, इसलिए कंपनियों की साइट्स पर ये सारे कलर उपलब्ध हैं। ज्यादातर ग्राहक इंटरनेट के जरिए कलर पसंद कर दुकान पर पहुंच रहे हैं।
एक दशक से रंगाई पुताई का ट्रेंड बदला
पिछले एक दशक से पेंट कारोबार में काफी बदलाव आया है। जहां पहले चूना और डिस्टेंबर की मांग थी अब ऑइल पेंट और प्लास्टिक पेंट चलन में आ गया है।
पेंट व्यवसायी रजनीश गुप्ता ने बताया कि श्राद्व पक्ष में कारोबार धीमा रहा। नवरात्र से रंगत आई है। इस बार लोग केवल महंगे पेंट से ही घर को चमकाने के लिए खरीदारी कर रहे हैं। लोग अब वास्तु के हिसाब से बेड रूम, ड्रांइग रूम और कीचन मेें कलर करा रहे हैं। साथ ही तीन दीवार लाइट व एक दीवार डार्क कलर की कराने के साथ उसमें डिजाइन बनाने का चलन बढ़ा है।
