बुराई का अंत रावण पर राम की विजय का प्रतीक दशहरे में महज दस दिन का समय शेष रहा है, लेकिन इस बार रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव में चुनाव की आचार संहिता अड़चन बन गई है। चुनाव में व्यस्त का दावा करने वाली नगर परिषद ने दशहरा उत्सव मनाने के लिए प्रयास ही नहीं, लेकिन जब विभिन्न संगठनों ने आयोजन के संबंध में जानकारी जुटाई तो पहले आचार संहिता होने की बात कही गई फिर जब सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर इस उत्सव को मनाने का प्रस्ताव रखा तो इसके आयोजन की अनुमति के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी से मार्गदर्शन मांगने का हवाला दिया गया। रामलीला मैदान में पिछले साल भी नगर परिषद प्रशासन के अधिकारियों ने अपने चेहते ठेकेदारों को दशहरा उत्सव के आयोजन का ठेका दिया, जब दशहरे से महज चार दिन शेष रहे थे। रावण परिवार के पुतले बनाने का काम तो एक महीने पहले शुरू हो गया था। इससे खफा एक ठेकेदार ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की गई तो इस ठेके की प्रक्रिया रोक दी गई। दरअसल तब सीएम अशोक गहलोत का अगले दिन का दौरा था, तब सीआईडी ने जिला प्रशासन को रिपोर्ट दी कि कई लोग नगर परिषद प्रशासन के इस प्रकरण को सीएम के समक्ष उठाएंगे। ऐसे में जिला प्रशासन के आदेश पर नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त गुरदीप सिंह ने आनन फानन में ठेके की प्रक्रिया निरस्त कर दी थी। ऐसे में सभापति के परिवार ने दशहरे उत्सव के आयोजन का खर्चा खुद वहन करने की घोषणा कर दी, तब जाकर पिछले साल रामलीला मैदान में यह उत्सव आयोजित हो पाया।
उत्सव के लिए 18 से 20 लाख रुपए का बजट
रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव आयोजन के लिए 18 से 20 लाख रुपए का बजट खर्च किया जाता है। पिछले साल नगर परिषद ने टेंडर किए थे, तब रावण का 60 फीट, कुंभकरण का 50 फीट और मेघनाथ का 45 फीट ऊंचा और छह फीट गोलाई के पुतलों के निर्माण में साढ़े तीन लाख रुपए, तीनों पुतलों में ग्रीन पटाखे और आतिशबाजी पर तीन लाख रुपए, साउण्ड व्यवस्था पर ढाई लाख रुपए, बैरीकेड्स व्यवस्था पर दो लाख तीस हजार रुपए, टैंट व्यवस्था पर दो लाख 70 हजार रुपए, लाइट व जनरेटर व्यवस्था पर एक लाख अस्सी हजार रुपए, कार्ड प्रिंटिंग व फ़लेक्स व्यवस्था पर डेढ़ लाख रुपए और वीडियोग्राफी पर करीब डेढ़ लाख रुपए सहित कुल 18 लाख 80 हजार रुपए अनुमानित दरें तय की थी।
तब से दो जगह रावण पुतलों का दहन
गत छह साल से महावीर दल मंदिर कमेटी अलग दशहरे का आयोजन कर रही है। रामलीला मैदान में दशहरे उत्सव आयोजन का अधिकार छिन जाने के बाद इस कमेटी ने पहले हनुमानगढ़ रोड पर सेक्टर सत्रह में दशहरे का उत्सव मनाया था। वहां मार्केट और प्राइवेट कॉलोनियों का जाल बिछने के कारण पिछले साल एसएसबी रोड पर एक प्राइवेट कॉलोनी की खाली भूमि पर यह उत्सव मनाया गया।
छह साल पहले 66 साल की बदली थी परपंरा
सुखाड़िया सर्किल रामलीला मैदान में श्री सनातन धर्म महावीर दल मंदिर कमेटी की ओर से दशहरे का आयोजन किया जाता था। यह कमेटी गंगानगर की स्थापना के 66 साल तक रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले दहन करती थी। यहां तक कि पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी इसी कमेटी की थी। तब रामलीला मैदान का क्षेत्राधिकार नगर विकास न्यास का था। ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से जिला प्रशासन इसकी मंजूरी देने में कोई अड़चन नहीं रखता था, लेकिन छह साल पहले वर्ष 2017 में नगर परिषद के तत्कालीन सभापति अजय चांडक ने इस कमेटी को रामलीला मैदान में दशहरा पर्व मनाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। यह मैदान तब यूआईटी से नगर परिषद को सौंपा जा चुका था। ऐसे में महावीर दल मंदिर कमेटी ने अलग से दशहरा मनाने का निर्णय लिया था, तब नगर परिषद प्रशासन इसी रामलीला मैदान में यह उत्सव आयोजित करने लगा, यह विवाद अब तक कायम है।
अनुमति के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी अधिकृत
चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण किसी भी धार्मिक या अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अब जिला निर्वाचन अधिकारी से अनुमति का प्रावधान है। मैंने नौ अक्टूबर को ही रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव के लिए अनुमति को जिला निर्वाचन अधिकारी से मार्गदर्शन मांगने के लिए पत्रावली भिजवा दी है। वहां से अनुमति आएगी तब आदेश जारी किए जाएंगे। - यशपाल आहुजा, आयुक्त नप
