Thu, 08 06, 2026
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अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए आगरा में भी तराशे जा रहे पत्थर:

हिंदू कारीगरों के साथ मुस्लिम कारीगर भी लगे हैं पत्थर तराशने में

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अयोध्या में श्री राम लला के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख 22 जनवरी फाइनल होने के बाद आगरा के फतेहपुर सीकरी में पत्थरों को तराशने के काम में तेजी आ गई है। यहां 65 कारीगर दिन-रात मंदिर के परकोटे के लिए पत्थरों को तराशने में जुटे हुए हैं। इनमें 6 मुस्लिम कारीगर भी हैं। फतेहपुर सीकरी के दूरा और खेरागढ़ गांव में पिछले पांच महीने से पत्थरों को तराशने का काम चल रहा है। जितने मन भाव से हिन्दू कारीगर पत्थरों को तराश रहे हैं उतने ही मन से मुस्लिम कारीगर हमीद खांए सद्दाम खान, नसरू, रफीक, नहनू खान कार्य कर रहे हैं। नसरू खान का कहना है कि हम गांव देहात के रहने वाले हैं। सब मिल-जुलकर रहते हैं। सभी त्योहार साथ मानते हैं तो भेदभाव कहां से आया। हम मन्दिर मस्जिद दोनों के लिए कार्य करते हैंए इससे ही हमारे परिवार का पालन पोषण होता है।
कारीगर श्री राम के काम में लगे

 कारीगर धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि यहां पर सभी कारीगर श्री राम के काम में लगे हैं, उन्हीं की कृपा से हमें रोजगार मिल रहा है। ये हमारा सौभाग्य है कि श्री राम के मंदिर में उनके हाथ से तराशे पत्थर लग रहे हैं।
पारम्परिक औजारों से नक्काशी का कार्य

 मंदिर के परकोटे के लिए तराशे जा रहे पत्थरों में कमल की नक्काशी में छतए पिलर सेट, खरसल कुम्भी, कांटा, सरा, ठेकी, भेटसरा, बीम, सिल, कडाउ, दासा प्रमुख हैं। शिल्पी पत्थरों को काट कर बिजली की मशीनों के साथ पारम्परिक औजारों से नक्काशी का कार्य कर रहे हैं। इन कारीगरों को योग्यतानुसार एक हजार से पंद्रह सौ रुपए तक मजदूरी मिल रही है।
भरतपुर जिले से पहुंचा पत्थर
कार्यशाला के सुपरवाइजर किशन स्वरूप का कहना है सारा पत्थर राजस्थान के भरतपुर जिले के बंशी पहाड़पुर से लाकर बसाना की स्पीटिंग कटर मशीन से कट कर यहां आता है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 5000 घन फुट पत्थर गढ़ कर अयोध्या भेजा जा चुका है।

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